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ये खबर उन पत्रकारो के लिए है जिनके शहर में आलीशान मकान है और फिर भी उनके पास सरकारी मकान है

लखनऊ / कोविड का ये कहर सबपर टूटा है , मैं खुद उसका एक उदाहरण हूँ लेकिन आज लखनऊ के एक मीडिया कर्मी का दर्द देखकर द्रवित हू । लखनऊ के वीडियो जर्नलिस्ट राजेश कुमार के साथ जो हुआ वो देखकर आत्मा दुखी है । राजेश ने अपने दर्द को शब्दों में पिरोकर एक प्रार्थना पत्र यूपी के सीएम के नाम भेजा है ।अब ये दर्द सीएम के पास पहुँचा या नही मुझे नही पता , पर मुझे लखनऊ के पत्रकारो की कोठियां आंखों के सामने नाचते हुए दिखने लगी जो अपने मकानों से लाखों रुपये किराए के उठा रहे है और फिर भी सरकारी मकान अपने पिछवाड़े तले दबाए बैठें है । हर मामले में पत्रकारो पर जुल्म करने वाली ये योगी सरकार न जाने उन जुल्मी पत्रकारो के कब्जे से मकान कब खाँली करवाएगी जिससे राजेश जैसे पत्रकारो को ये जलालत न झेलनी पड़े । फिर किसी के परिवार को कोई मकान मालिक आधी रात को घर से बाहर न निकाले और फिर किसी का परिवार जलील न हो  औऱ हाँ ऐसे मकान मालिकों को तो जरूर यूपी पुलिस के जवानों के माध्यम से डंडा परेड करवानी चाहिए ।

 

फिलहाल राजेश के द्वारा सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखा हुआ पत्र यहाँ पोस्ट कर रहा हूं ।

 

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी,
5-कालिदास मार्ग, लखनऊ, उत्तर प्रदेश।

महोदय,
आपको अवगत कराना चाहता हूं कि मैं राजेश कुमार 8 अप्रैल 2021 को सिविल हॉस्पिटल में जांच कराया और 9 अप्रैल 2021 शाम तकरीबन 8:00 बजे मुझे पता चला कि मेरी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव है। मैंने तत्काल अपने ऑफिस में सूचना दी उसके बाद मैंने अपनी पत्नी को बताया, मेरी पत्नी ने जब यह सूचना मकान मालिक श्रवण कुमार शुक्ला को बताई तो उनका जवाब हैरान करने वाला था। मेरी पत्नी से शुक्ला ने कहा कि मैं उसे घर में नहीं घुसने दूंगा जहां जाना है जाए, उसके आधे घंटे बाद मैंने श्रवण शुक्ला को फोन किया, तो उन्होंने मुझे कहा कि देखिए राजेश तुम कोरोना पॉजिटिव हो इसलिए मैं तुम्हें घर में नहीं घुसने दूंगा। हॉस्पिटल में एडमिट होना है हो जाओ या कहीं होटल में रहना है रहो लेकिन मैं तुम्हें घर में नहीं घुसने दूंगा। एक तो मेरे ऊपर कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव होने का तनाव और ऊपर से इनका इस तरीके से मुझसे बात करना मैं बहुत तनाव में था, फिर मैं रात कहीं और किसी तरह से गुजारी और सुबह होते ही पैसे और कपड़े मैंने किसी मित्र के थ्रू अपनी पत्नी से मंगवाया, फिर मैं अगले दिन अपने गांव चला गया वहां होम आइसोलेशन में रहा। फिर श्रवण कुमार शुक्ला मेरी पत्नी को फोन करते हैं कि तुम्हें घर नहीं घुसने दूंगा जब तक तुम लोग जांच रिपोर्ट नहीं दिखाओगे। इस तरीके से इन्होंने मेरी पत्नी को तनाव दिया व परेशान किया, जबकि मेरे दोनों बच्चे लखनऊ के चौक में ही है, परंतु मेरा होम क्वारन्टीन पूरा हुआ ही नहीं। 19 अप्रैल 2021 को श्रवण शुक्ला का फिर फोन आता है और मेरे प्रति जितना उनको भड़ास निकालनी थी जितना मुझे नीचा दिखाने की कोशिश करनी थी वह सारा किया, उन्होंने यह भी कहा कि मेरा घर 3 दिन में खाली कर दो ऐसी स्थिति में बार-बार तनाव देना मुझे बहुत ही कष्ट व पीड़ा दिया और मेरे परिवार को तितर-बितर कर दिया तथा लखनऊ में जो होम आइसोलेशन की सुविधा मिलनी थी जांच दवा उन सब से वंचित रह गया। अपने पैसे से दवा खरीदी श्रवण कुमार शुक्ला ना तो अपनी जांच कराई ना मेरे बच्चों की जांच होने दी सिर्फ अपनी ज़िद पर अड़ा रहा। श्रवण शुक्ला का कहना है कि कोरोनावायरस से अगर मैं बच गया तो मैं अमर हो जाऊंगा, फिर मेरी किसी चीज से मृत्यु नहीं हो सकती है। मैं यह कहना चाहता हूं कि यह बीमारी बहुत डरावनी है लेकिन इतनी भी नहीं है कि इससे ठीक ना हुआ जाए। यदि धैर्य और संयम से इलाज किया जाए तो सब संभव है। मगर जब ऐसे लोग कोरोनावायरस का भय फैलाएंगे और शोषण करेंगे तो जिसे नहीं मरना होगा वह भी मर जाएगा।

माननीय मुख्यमंत्री जी आपसे निवेदन है कि ऐसे लोगों के प्रति कठोर से कठोर कार्रवाई करवाएं, मैं बहुत परेशान हूं यदि और मेरा शोषण किया गया तो इसके जिम्मेदार श्रवण कुमार शुक्ला होंगे, क्योंकि इन्होंने फोन करके हमको नौकरी से हटवा देने की, प्रदेश में रहने नहीं देंने की धमकी दी है। शुक्ला ने कहा है कि 1 मिनट में फोन करके नौकरी ले लेंगे, 1 मिनट में फोन करके क्या हश्र करूंगा यह तुम जानते नहीं हो, ऐसा कह रहे हैं मेरा सारा सामान और मेरे दो बच्चे 414/151 सराय मालिखा लखनऊ के मकान में रह रहे थे, लेकिन 4 अप्रैल 2021 की रात 1:00 बजे मुझे उनकी प्रताड़ना के चक्कर में घर छोड़ना पड़ा और आज मैं रोड पर खड़ा हूं। ना मुझे कोई किराए का मकान मिल रहा है ना रहने की कोई जगह है ऐसे में इस इंसान की क्रूरता लोगों तक पहुंचनी चाहिए।

माननीय मुख्यमंत्री जी आपसे इतना ही निवेदन है कि मैं प्रदेश का एक नागरिक हू, कई वर्षों से प्रतिष्ठित चैनलों में वीडियो जर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हूं, यह मेरी पीड़ा है जो मेरे साथ घटी है, दिल से निकली हुई यह कोई कहानी नहीं है यह वह सत्य है जिसे हर आम आदमी तक पहुंचना चाहिए। जिनको कोविड-19 हो जाता है उनके प्रति पढ़े लिखे लोगों का क्या नजरिया है यह बयां कर रहा हूं। लेकिन वह भूल गए हैं हाथी कितना भी बलवान क्यों ना हो चींटी अगर हाथी के कान में घुस गई तो हाथी को तिलमिलाने के अलावा कुछ नहीं बचता।
घटना से जुड़े सारे तथ्यों सबूत मेरे पास हैं, वक्त आने पर सोशल मीडिया पर शेयर करूंगा।
एक बहुत बड़े अपने आपको पत्रकार कहने वाले की सोच इतनी घटिया है इसका प्रमाण मेरे साथ की घटना बयां करता है।

मैं इस घर में कई वर्षों से किराए पर रह रहा था।
मुख्यमंत्री जी आपसे एक बार पुनः निवेदन करता हूं कि इनके ऊपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, इन्होंने हमारा शोषण किया है, हमारे परिवार का प्रताड़ना किया है और उन्होंने कोविड-19 प्रोटोकॉल का भी उल्लंघन किया है। आपसे न्याय की उम्मीद करता हूं।

प्रार्थी-
राजेश कुमार,
सीनियर वीडियो जर्नलिस्ट
414/151 सराय माली खा चौक,
लखनऊ, यूपी।

दिनांक 05-05-2021

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