करवा चौथ 2025, पूजा सामग्री, विधि और संपूर्ण जानकारी…
Karwa Chauth 2025, Puja Samagri, Vidhi and complete details...

Breaking Today, Digital Desk : करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। यह दिन वे अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। साल 2025 में करवा चौथ कब है, पूजा की सही विधि क्या है और आपको किन-किन चीजों की ज़रूरत पड़ेगी, आइए जानते हैं इस लेख में।
करवा चौथ 2025 कब है?
साल 2025 में करवा चौथ का व्रत [तारीख यहाँ डालें, जैसे 18 अक्टूबर 2025] को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलती हैं।
करवा चौथ पूजा की तैयारी और सामग्री
करवा चौथ की पूजा में कई चीज़ों की ज़रूरत होती है। पूजा शुरू करने से पहले इन सभी सामग्री को इकट्ठा कर लेना अच्छा रहता है:
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करवा (मिट्टी या धातु का कलश): इसमें पानी भरकर रखा जाता है।
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दीपक: पूजा के लिए।
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दीपक जलाने के लिए घी या तेल और बाती।
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छलनी: चंद्रमा को देखने के लिए।
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लोटा: चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए।
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जल: करवे और लोटे में भरने के लिए।
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मिठाई: भोग के लिए।
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फल: भोग के लिए।
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धूप और अगरबत्ती।
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कपूर: आरती के लिए।
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कुमकुम/रोली: तिलक के लिए।
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चावल: पूजा में इस्तेमाल करने के लिए।
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फूल: पूजा के लिए।
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दक्षिणा: पंडित जी या किसी ब्राह्मण को देने के लिए।
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सुहाग का सामान: जैसे मेहंदी, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, महावर, लाल चुनरी आदि। यह सारा सामान देवी को अर्पित किया जाता है और फिर खुद भी इस्तेमाल किया जाता है।
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गेहूं या चावल: करवे पर रखने के लिए।
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मिट्टी का ढक्कन: करवे को ढकने के लिए।
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करवा चौथ कथा की पुस्तक: कथा सुनने के लिए।
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कच्चा दूध: चंद्रमा को अर्घ्य देते समय।
करवा चौथ पूजा विधि
करवा चौथ की पूजा विधि थोड़ी लंबी होती है, लेकिन श्रद्धा के साथ करने से मन को शांति मिलती है:
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सुबह की तैयारी: करवा चौथ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद यह संकल्प लें कि आप पूरे दिन निर्जला व्रत रखेंगी।
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सरगी: अगर आपकी सास हैं, तो वे आपको सरगी देती हैं। सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है, जिसमें फल, मिठाई और कुछ गरिष्ठ भोजन होता है ताकि आप पूरे दिन ऊर्जावान रह सकें।
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पूजा की चौकी तैयार करना: शाम को पूजा के लिए एक साफ जगह पर चौकी स्थापित करें। इस पर लाल कपड़ा बिछाएं और भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर रखें।
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करवा स्थापना: चौकी पर एक मिट्टी का करवा रखें। इसमें पानी भरकर ऊपर से मिट्टी का ढक्कन रख दें। ढक्कन के ऊपर गेहूं या चावल रखें। करवे के चारों ओर मौली बांधें और कुमकुम का तिलक करें।
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दीपक जलाना: एक दीपक जलाकर चौकी पर रखें।
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कथा सुनना: सभी व्रत रखने वाली महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं। कथा सुनते समय सभी अपने हाथ में चावल या गेहूं के दाने रखती हैं। कथा समाप्त होने पर ये दाने देवी को अर्पित किए जाते हैं।
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आरती: कथा के बाद भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की आरती करें।
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चंद्रमा का इंतज़ार: रात को जब चंद्रमा निकल आए, तब एक थाली में दीपक, फल, मिठाई और जल भरा लोटा लें।
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चंद्रमा को अर्घ्य: चंद्रमा को छलनी से देखें और फिर लोटे से धीरे-धीरे अर्घ्य दें (जल चढ़ाएं)। अर्घ्य देते समय अपनी इच्छाएं दोहराएं और पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करें।
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पति का दर्शन: चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें। इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोलें।
करवा चौथ का यह त्योहार पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और विश्वास को और गहरा करता है।






