
Breaking Today, Digital Desk : नेपाल में इन दिनों राजनीतिक ड्रामा अपने चरम पर है। आधी रात को शुरू हुआ हंगामा और कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान ने सबको चौंका दिया है। सत्ताधारी गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा और इसका असर देश की राजनीति पर साफ दिख रहा है।
आखिर माजरा क्या है?
दरअसल, प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल “प्रचंड” और पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के बीच सत्ता के बंटवारे को लेकर गहरी खाई पैदा हो गई है। ओली की पार्टी, CPN-UML, ने प्रचंड को समर्थन तो दिया था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि प्रचंड समझौते का पालन नहीं कर रहे हैं। विशेष रूप से, राष्ट्रपति चुनाव को लेकर दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
आधी रात का विरोध प्रदर्शन
पिछले दिनों, CPN-UML के कुछ युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आधी रात को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि प्रचंड गठबंधन धर्म का पालन नहीं कर रहे और मनमानी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने ही प्रचंड को प्रधानमंत्री की कुर्सी दी थी और अगर जरूरत पड़ी तो वे उसे वापस लेना भी जानते हैं। यह विरोध प्रदर्शन दिखाता है कि ओली खेमा कितना नाराज है और वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
सत्ता का खेल और भविष्य की चुनौतियाँ
नेपाल की राजनीति में यह कोई नई बात नहीं है, जहाँ गठबंधन बनते और टूटते रहते हैं। लेकिन इस बार का विवाद काफी गहरा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सरकार के स्थायित्व को प्रभावित कर रहा है। प्रचंड के लिए चुनौती यह है कि वे कैसे अपने गठबंधन सहयोगियों को साथ लेकर चलते हैं, खासकर जब उनके सबसे बड़े सहयोगी ओली के साथ संबंध तनावपूर्ण हों।
राष्ट्रपति चुनाव नजदीक हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों नेता किस तरह से इस स्थिति से निपटते हैं। क्या प्रचंड अपनी कुर्सी बचा पाएंगे या ओली एक बार फिर सत्ता के केंद्र में आ जाएंगे? नेपाल की राजनीति में अगले कुछ हफ्ते काफी अहम होने वाले हैं।




