
Breaking Today, Digital Desk : क्या आपने कभी सोचा है कि जेम्स कैमरन की ‘टाइटैनिक’ इतनी असली क्यों लगती है? खासकर वो सीन जब जहाज दो हिस्सों में टूटता है और पानी का सैलाब सब कुछ बहा ले जाता है? दरअसल, इसके पीछे कैमरन की एक ऐसी जिद थी जिसने फिल्ममेकिंग के इतिहास में अपनी छाप छोड़ी।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस सीन को बिल्कुल असली दिखाने के लिए जेम्स कैमरन ने करीब 90,000 गैलन पानी डंप करवाया था। जी हां, इतना सारा पानी! ये कोई छोटी बात नहीं थी। आमतौर पर, ऐसी जगहों पर स्पेशल इफेक्ट्स का इस्तेमाल होता है, लेकिन कैमरन तो कैमरन ठहरे। वो चाहते थे कि सब कुछ ऐसा लगे जैसे आप सच में उस पल को देख रहे हों।
जब जहाज टूटने लगता है और उसका पिछला हिस्सा ऊपर उठ जाता है, तब के लिए उन्होंने ये कमाल किया। इससे जहाज पर मौजूद लोग और सारा मलबा जिस तरह से पानी में गिरता है, वो बिल्कुल जीवंत लगता है। ये सिर्फ एक डायरेक्टर का विजन नहीं था, बल्कि perfection की एक मिसाल थी। इस एक सीन ने फिल्म को और भी ज्यादा यादगार बना दिया।
आज भी जब हम टाइटैनिक देखते हैं, तो वो सीन हमें झकझोर देता है। और अब आपको पता है कि उस “असलीपन” के पीछे कितनी मेहनत और कितना पानी बहाया गया था। वाकई, जेम्स कैमरन जैसा कोई नहीं






