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तेंदुए के आतंक से दहला पुणे का गाँव, आखिर कब तक सहेंगे ये हमले…

Leopard terror terrifies Pune village, how long will they endure these attacks.

Breaking Today, Digital Desk : पुणे के पास एक गाँव में तेंदुए के हमले से 13 साल के बच्चे की मौत हो गई। इस घटना से पूरे गाँव में दहशत और गुस्सा है। गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया।

क्या हुआ था?

यह घटना पुणे जिले के जुन्नर तालुका के जांभुद गाँव में हुई। बुधवार शाम को 13 साल का कृष्णा भिडे अपने घर के पास खेल रहा था, तभी एक तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। तेंदुए कृष्णा को घसीटकर पास के गन्ने के खेत में ले गया।

कृष्णा के परिवार और गाँव वालों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तेंदुए के हमले से कृष्णा की मौके पर ही मौत हो गई थी।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

इस घटना के बाद गाँव वाले बहुत गुस्से में थे। उनका कहना था कि वन विभाग तेंदुए के आतंक को रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में इस इलाके में तेंदुए के हमले बढ़े हैं, जिससे लोग डरे हुए हैं।

गुस्साए ग्रामीणों ने कृष्णा के शव को सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और मुआवजे की मांग की। इसी दौरान, प्रदर्शन हिंसक हो गया और ग्रामीणों ने वन विभाग की एक गाड़ी में आग लगा दी।

वन विभाग की कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने ग्रामीणों को शांत करने की कोशिश की और आश्वासन दिया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए जल्द ही कदम उठाए जाएंगे।

वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए हैं और इलाके में गश्त बढ़ा दी है। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने और रात में अकेले बाहर न निकलने की अपील की है।

मुआवजे का ऐलान

सरकार ने कृष्णा के परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही, वन विभाग ने यह भी कहा है कि तेंदुए को जल्द से जल्द पकड़ लिया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।

आगे क्या?

इस घटना ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की समस्या को उजागर किया है। शहरीकरण और वनों की कटाई के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं, जिससे वेBस्तियों की ओर आ रहे हैं। इस समस्या का समाधान ढूंढना बहुत ज़रूरी है ताकि ऐसे दुखद हादसे दोबारा न हों।

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