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निमिषा प्रिया की माफ़ी की खबरों पर मृतक के भाई ने तोड़ी चुप्पी…

"His blood is not for bargaining": The deceased's brother breaks silence on reports of Nimisha Priya's apology

Breaking Today, Digital Desk : यमन में हत्या के आरोप में मौत की सज़ा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की माफ़ी की अटकलों को मृतक तलाल अब्दो महदी के भाई ने सिरे से खारिज कर दिया है एक भावुक और कड़े बयान में, अब्दुल फतह महदी ने स्पष्ट किया कि उनके भाई का खून “समझौते के बाज़ार में बिकने वाली वस्तु नहीं है” और उनके परिवार ने निमिषा को माफ़ करने के किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं किया है.

यह बयान उन खबरों के बाद आया है, जिनमें भारत के ग्रैंड मुफ्ती कांथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के कार्यालय द्वारा दावा किया गया था कि मध्यस्थता के प्रयासों के बाद निमिषा प्रिया की मौत की सज़ा रद्द कर दी गई है. हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है और इन्हें “गलत” बताया है.

अब्दुल फतह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मध्यस्थता के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनसे या उनके परिवार से किसी ने भी सीधे तौर पर संपर्क नहीं किया है.[1] उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनका परिवार “बिना किसी देरी के न्याय की पूरी तामील चाहता है”.[7] उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि अल्लाह का कानून लागू हो, यानी किसास (बदले में प्रतिशोध).”

मृतक के भाई ने कुछ भारतीय मीडिया चैनलों पर भावनात्मक कहानी और प्रचार के नाम पर स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का भी आरोप लगाया.[3] उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका परिवार ब्लड मनी (दियत) यानी मुआवज़े के बदले माफ़ी देने के लिए तैयार नहीं है और वे चाहते हैं कि निमिषा की सज़ा-ए-मौत पर अमल किया जाए.

गौरतलब है कि केरल के पलक्कड़ की रहने वाली निमिषा प्रिया को 2017 में अपने यमनी बिज़नेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी की हत्या करने और उसके शव को पानी की टंकी में छिपाने का दोषी पाया गया था, जिसके बाद 2020 में उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई थी. निमिषा का कहना था कि तलाल ने उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया था और उसके साथ दुर्व्यवहार करता था.

निमिषा की माँ प्रेमाकुमारी अपनी बेटी की जान बचाने की उम्मीद में “ब्लड मनी” पर बातचीत के लिए यमन भी गई थीं. हालांकि, तलाल के परिवार के कड़े रुख के बाद, निमिषा प्रिया का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है, क्योंकि यमन में शरिया कानून के तहत पीड़ित परिवार के पास दोषी को माफ़ करने या सज़ा-ए-मौत की मांग करने का अधिकार होता है.

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