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बिहार चुनाव आयोग तक विपक्ष का मार्च, ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर दिल्ली में सियासी घमासान…

Opposition marches to Bihar Election Commission, political uproar in Delhi over allegations of 'vote theft'

Breaking Today, Digital Desk : बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर छिड़ा सियासी संग्राम अब दिल्ली की सड़कों पर उतर आया है। सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकाला, जिसे पुलिस ने बीच में ही रोक दिया। ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोप लगाते हुए विपक्षी नेताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके दौरान नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिले।

विपक्षी दलों ने एसआईआर प्रक्रिया को “खामोश अदृश्य धांधली” और “वोट-बंदी” करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस कवायद के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। इसी विरोध को दर्ज कराने के लिए ‘इंडिया’ गठबंधन के लगभग 300 सांसद, जिनमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव जैसे प्रमुख नेता शामिल थे, ने चुनाव आयोग की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारी सांसदों ने ‘एसआईआर’ और ‘वोट चोरी’ लिखी टोपियां पहन रखी थीं।

दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की इजाजत नहीं दी थी और भारी सुरक्षा बल तैनात कर रखा था। परिवहन भवन के पास पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च को रोक दिया, जिसके बाद विपक्ष के सांसद वहीं धरने पर बैठ गए। इस दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को पुलिस का बैरिकेड फांदते हुए भी देखा गया, जिससे स्थिति में और तनाव आ गया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें चुनाव आयोग से मिलने नहीं दिया जा रहा है।

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद के मानसून सत्र में भी लगातार उठा रहे हैं और इस पर चर्चा की मांग कर रहे हैं, जिसके कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई है। विपक्ष का कहना है कि यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और वे इस पर सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह विरोध जारी रखेंगे। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग, सरकार के दबाव में काम कर रहा है और उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दे रहा है।

दूसरी ओर, इस पूरे विवाद के बीच, चुनाव आयोग ने आज दोपहर 12 बजे विपक्षी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय दिया। हालांकि, मार्च के दौरान हुए टकराव ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। यह घटनाक्रम बिहार चुनाव से पहले केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच बढ़ते टकराव का स्पष्ट संकेत है।

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