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ट्रंप की यूक्रेन शांति योजना, ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर एक खतरनाक सौदा…

Trump's Ukraine peace plan is a dangerous deal far from ground reality...

Breaking Today, Digital Desk : पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी विवादास्पद कूटनीतिक शैली को लेकर चर्चा में हैं। इस बार मुद्दा यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए उनकी प्रस्तावित ‘क्षेत्र अदला-बदली’ योजना है। यह प्रस्ताव जितना सुनने में आसान लगता है, ज़मीनी हकीकत और नक्शे पर इसके मायने उतने ही जटिल और खतरनाक हैं। ट्रंप का दावा है कि वे रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित करने के लिए एक सौदा करा सकते हैं, जिसमें यूक्रेन को अपने कुछ क्षेत्र रूस को सौंपने होंगे।

नक्शे पर कैसा दिखेगा यह सौदा?

ट्रंप की योजना का आधिकारिक खाका तो सामने नहीं आया है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इसमें रूस द्वारा 2014 में अवैध रूप से कब्जाए गए क्रीमिया और वर्तमान में आंशिक रूप से कब्जे वाले चार यूक्रेनी प्रांतों – डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज़्ज़िया – को रूस को सौंपना शामिल हो सकता है। रूस वर्तमान में यूक्रेन के लगभग पांचवें हिस्से पर काबिज है। प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क हो सकता है कि यह युद्ध को तुरंत रोक देगा, लेकिन आलोचक इसे आक्रमणकारी को पुरस्कृत करने जैसा मानते हैं।

ज़मीनी हकीकत: एक असंभव मिशन

ट्रंप का यह प्रस्ताव कई गंभीर बाधाओं से टकराता है। सबसे बड़ी और स्पष्ट आपत्ति यूक्रेन की तरफ से है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस विचार को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यूक्रेन अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगा और अपनी एक इंच भी ज़मीन कब्जा करने वालों को नहीं देगा।

दूसरी बड़ी बाधा यूरोप की तरफ से है। यूरोपीय संघ के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन के भविष्य का फैसला यूक्रेन के बिना नहीं किया जा सकता। उनकी चिंता यह है कि ट्रंप, नोबेल शांति पुरस्कार की महत्वाकांक्षा में, यूक्रेन के हितों की अनदेखी करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ कोई एकतरफा समझौता कर सकते हैं। फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड समेत कई यूरोपीय देशों का मानना है कि किसी भी शांति वार्ता की पहली शर्त पूर्ण युद्धविराम होनी चाहिए, न कि क्षेत्रों का आत्मसमर्पण।

विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इस तरह का सौदा रूस को भविष्य में और आक्रामक होने के लिए प्रोत्साहित करेगा। यदि रूस को आक्रमण के माध्यम से क्षेत्र हासिल करने की अनुमति दी जाती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा। यह युद्ध को समाप्त करने के बजाय, भविष्य के संघर्षों के बीज बो सकता है। इसलिए, ट्रंप की ‘क्षेत्र अदला-बदली’ की योजना नक्शे पर भले ही एक त्वरित समाधान की तरह दिखे, लेकिन ज़मीनी हकीकत, यूक्रेन के कड़े प्रतिरोध और यूरोपीय सहयोगियों की चिंताओं के कारण यह एक अव्यावहारिक और खतरनाक प्रस्ताव नजर आता है।

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