अनंत चतुर्दशी 2025, बस एक धागा और आपके सारे दुख दूर…
Anant Chaturdashi 2025, just a thread and all your sorrows will go away...

Breaking Today, Digital Desk : क्या आप जानते हैं कि अनंत चतुर्दशी का हमारे जीवन में क्या खास महत्व है? यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, धैर्य और अनंत शक्ति का प्रतीक है। 2025 में यह कब आ रही है और इसकी पूजा कैसे की जाती है, आइए जानते हैं।
अनंत चतुर्दशी का पर्व भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। यह त्योहार विशेष रूप से गणेश विसर्जन के साथ जुड़ा हुआ है, लेकिन इसका अपना एक अलग महत्व भी है। इस दिन भक्त अपने दुखों को हरने और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।
अनंत चतुर्दशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
2025 में अनंत चतुर्दशी का पर्व 8 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा।
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चतुर्दशी तिथि का आरंभ: 7 सितंबर, 2025 को शाम 07:08 बजे
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चतुर्दशी तिथि का समापन: 8 सितंबर, 2025 को शाम 07:44 बजे
पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह का होता है, जब आप शांत मन से भगवान का ध्यान कर सकें।
पूजा विधि: कैसे करें अनंत चतुर्दशी की पूजा?
अनंत चतुर्दशी की पूजा बहुत ही सरल और भावपूर्ण होती है। इसे आप घर पर भी आसानी से कर सकते हैं:
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स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
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अनंत सूत्र: इस दिन अनंत सूत्र धारण करने का विशेष महत्व है। यह धागा रेशम या सूती का हो सकता है, जिसमें 14 गांठें लगी होती हैं। पुरुष इसे दाहिनी भुजा पर और महिलाएं बायीं भुजा पर बांधती हैं। यह अनंत सूत्र भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।
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पूजन सामग्री: पूजा के लिए भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर, पंचामृत, फल, फूल, धूप, दीप, चंदन, तुलसी दल और नैवेद्य (मिठाई) तैयार कर लें।
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पूजा और मंत्र: एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें तिलक लगाएं, फूल चढ़ाएं और धूप-दीप जलाएं। ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए पूजा करें। अनंत सूत्र को भी भगवान के चरणों में रखकर उसकी पूजा करें।
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कथा श्रवण: पूजा के बाद अनंत चतुर्दशी की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। यह कथा आपको इस पर्व के महत्व और लाभ के बारे में बताएगी।
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अनंत सूत्र धारण: पूजा समाप्त होने के बाद, अनंत सूत्र को अपनी भुजा पर धारण करें। इसे साल भर तक धारण किया जाता है और अगले साल चतुर्दशी पर नया सूत्र धारण किया जाता है।
अनंत चतुर्दशी का महत्व: क्यों है यह इतनी खास?
अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने से व्यक्ति को अनंत फल की प्राप्ति होती है। यह व्रत सुख-समृद्धि, धन-धान्य और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से अटके हुए काम पूरे होते हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है।
इस दिन गणेश विसर्जन भी होता है, जिससे यह दिन और भी खास बन जाता है। भगवान गणेश की विदाई के साथ, हम उनसे अगले साल फिर आने का आग्रह करते हैं।
तो, 2025 में आने वाली अनंत चतुर्दशी पर आप भी इस पावन पर्व को पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मनाएं और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।






