
Breaking Today, Digital Desk : केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने हाल ही में भारत की दो प्रमुख पर्यावरणीय पहलों पर बड़ी घोषणाएं की हैं। एक ओर जहां उन्होंने महत्वाकांक्षी ‘चीता प्रोजेक्ट’ को उम्मीद से कहीं ज़्यादा सफल बताया है, वहीं दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता और रणनीतियों को भी दुनिया के सामने रखा है। यादव के अनुसार, इन दोनों ही क्षेत्रों में भारत न केवल अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर रहा है, बल्कि विश्व के लिए एक मिसाल भी कायम कर रहा है।
भारत की धरती पर एक बार फिर चीतों की वापसी की महत्वाकांक्षी योजना, ‘प्रोजेक्ट चीता’, शुरुआती चुनौतियों के बावजूद सफलता की नई कहानियां लिख रही है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों के कारण कुछ चीतों की मौत दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन समग्र रूप से यह परियोजना हमारी उम्मीदों से बेहतर परिणाम दे रही है।
यादव ने बताया कि भारत में चीतों का कुनबा अब बढ़कर 25 से अधिक हो गया है, जिसमें कूनो नेशनल पार्क में जन्मे शावक भी शामिल हैं। यह सफलता इस बात का प्रतीक है कि भारत की धरती चीतों के लिए अनुकूल है और उनके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास सही दिशा में हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संरक्षण एक लंबी और धैर्य की मांग करने वाली प्रक्रिया है, लेकिन पिछले दो वर्षों में मिली सफलता अभूतपूर्व है। इस परियोजना के अगले चरण में, मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को चीतों के दूसरे घर के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है, जहां जल्द ही और चीतों को बसाया जाएगा।
यह परियोजना सिर्फ चीतों की आबादी को फिर से स्थापित करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा उद्देश्य भारत के पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बहाल करना भी है। 1952 में विलुप्त घोषित होने के बाद, चीतों की वापसी वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना है।
पर्यावरण संरक्षण की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भूपेंद्र यादव ने जलवायु परिवर्तन के मोर्चे पर भारत की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, जलवायु परिवर्तन की समस्या का हिस्सा नहीं, बल्कि समाधान का एक महत्वपूर्ण अंग बनकर उभरा है। भारत ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के तहत कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लक्ष्यों को 2030 की समय सीमा से नौ साल पहले ही 2021 में हासिल कर लिया है।
यादव ने विकसित देशों को उनकी जलवायु वित्तपोषण की प्रतिबद्धताओं की भी याद दिलाई और कहा कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा और विकास की आकांक्षाओं को पूरा करते हुए पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है और ‘मिशन लाइफ’ जैसी पहलों के माध्यम से संसाधनों के सतत उपयोग को एक जन आंदोलन बना रहा है।
इस प्रकार, चाहे वह अपनी धरती पर चीतों को फिर से बसाने का ऐतिहासिक कार्य हो या वैश्विक मंच पर जलवायु न्याय की वकालत करना, भारत पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के दोहरे लक्ष्यों के साथ आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है।




