
Breaking Today, Digital Desk : लद्दाख की गलवान घाटी में 2020 में हुए घातक सैन्य संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्तों में आए तनाव के बीच, चीन का सरकारी मीडिया अब आपसी लाभ और साझा विकास की बातें कर रहा है. यह बदलते रुख का संकेत हो सकता है, जहाँ चीन यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के हित टकराव में नहीं, बल्कि सहयोग में हैं.
एक हालिया रिपोर्ट में, चीन के सरकारी मीडिया ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत और चीन को मिलकर काम करना चाहिए ताकि दोनों देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ सकें. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश की काफी संभावनाएं हैं, जिनका पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए. चीनी मीडिया का यह रुख ऐसे समय में आया ہے जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर कई दौर की सैन्य और राजनयिक स्तर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है.
हालांकि, कुछ विशेषज्ञ चीनी मीडिया के इस बदले हुए रुख को संदेह की नजर से देख रहे हैं. उनका मानना है कि यह चीन की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद दुनिया को यह दिखाना है कि वह शांति और सहयोग کا خواہاں ہے, जबकि वह अपनी विस्तारवादी नीतियों पर कायम है. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत को चीन के साथ किसी भी तरह के सहयोग से पहले अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को प्राथमिकता देनी चाहिए.
भारत और चीन के बीच संबंध पिछले कुछ सालों में काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं. 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच विश्वास की भारी कमी आई है. इस झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे, جبکہ چین کے بھی कई सैनिक मारे गए थे. इस घटना के बाद भारत ने कई चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था और चीन से आने वाले निवेश की भी गहन जांच शुरू कर दी थी.
अब देखना यह होगा कि क्या चीनी मीडिया का यह बदला हुआ रुख वास्तव में दोनों देशों के संबंधों में सुधार ला पाएगा, या यह सिर्फ एक दिखावा है. भारत को इस मामले में सतर्क रहने की जरूरत है और अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना होगा




