
Breaking Today, Digital Desk : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तस्वीर ने देश में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस तस्वीर में स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर को महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह जैसे अन्य प्रमुख नेताओं के साथ दिखाया गया था। पोस्टर के जारी होते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और सरकार पर इतिहास से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने इस पोस्टर को स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान बताया है, खासकर महात्मा गांधी का। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर एक ऐसी शख्सियत को महिमामंडित करने की कोशिश की है जो ऐतिहासिक रूप से विवादास्पद रही है और जिन पर अंग्रेजों से माफी मांगने के आरोप लगते रहे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट करते-करते अब आप स्वतंत्रता सेनानियों में भी मिलावट करने लग गए। जो इतिहास में बड़े नहीं बन सके, उनको पोस्टर में बड़ा बना रहे हो।” उन्होंने आगे कहा, “देश आपसे सस्ता तेल मांग रहा है, सस्ती कॉमेडी नहीं।” यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और बहस का केंद्र बन गई।
वहीं, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि हर स्वतंत्रता दिवस पर बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार इतिहास को तोड़-मरोड़कर देशद्रोहियों को नायक बनाने का काम करती है। उन्होंने कहा कि सावरकर जैसे “ब्रिटिश दया याचिकाकर्ता” को गांधी जी से ऊपर दिखाना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सरकार की mépris (अवमानना) को दर्शाता है।
इस विवाद ने एक बार फिर “गांधी बनाम सावरकर” की बहस को हवा दे दी है। जहां भाजपा और उसके समर्थक सावरकर को एक महान क्रांतिकारी और राष्ट्रवादी के रूप में सम्मानित करते हैं, वहीं कांग्रेस और कई अन्य दल उनके माफीनामे और उनकी विचारधारा को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। फिलहाल, पेट्रोलियम मंत्रालय के इस पोस्टर ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, जो जल्द शांत होती नहीं दिख रही है।






