
Breaking Today, Digital Desk : आज से 15 साल पहले, एलिजाबेथ गिल्बर्ट की किताब “ईट, प्रे, लव” ने दुनिया भर के लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई थी। यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि एक महिला की खुद को फिर से खोजने की यात्रा थी, जो आज भी लोगों को प्रेरणा देती है। तलाक के बाद टूटे हुए दिल और एक खालीपन को भरने के लिए, गिल्बर्ट ने सब कुछ पीछे छोड़कर एक साल की यात्रा पर निकलने का फैसला किया। यह यात्रा उन्हें तीन अलग-अलग देशों में ले गई, जहाँ उन्होंने जीवन के तीन अलग-अलग पहलुओं का अनुभव किया: इटली में भोजन का आनंद, भारत में आध्यात्मिकता की खोज और बाली में प्यार और संतुलन।
नेपल्स की तंग गलियों से लेकर वहां के पिज्जा के स्वाद तक, गिल्बर्ट की यात्रा का पहला पड़ाव आनंद और भोजन को समर्पित था। उन्होंने इतालवी भाषा सीखी, नए दोस्त बनाए और बिना किसी अपराधबोध के जीवन के छोटे-छोटे सुखों का आनंद लेना सीखा। उनकी यह यात्रा हमें सिखाती है कि कभी-कभी खुद को खुश रखना कितना ज़रूरी है, और भोजन सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि आत्मा को तृप्त करने का एक माध्यम भी है।
इसके बाद, उनकी आध्यात्मिक खोज उन्हें भारत ले आई। यहां एक आश्रम में रहते हुए, उन्होंने ध्यान और प्रार्थना के माध्यम से अपने मन की उथल-पुथल को शांत करने का प्रयास किया। यह पड़ाव आत्म-अनुशासन, क्षमा और आंतरिक शांति की तलाश के बारे में था। भारत की इस आध्यात्मिक भूमि पर, उन्होंने अपने भीतर के द्वंद्वों का सामना किया और खुद को माफ करना सीखा, जो आत्म-खोज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
उनकी यात्रा का अंतिम पड़ाव इंडोनेशिया का खूबसूरत द्वीप बाली था। यहाँ उन्हें अप्रत्याशित रूप से प्यार मिला, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि उन्होंने जीवन में संतुलन बनाना सीखा। बाली ने उन्हें सिखाया कि दुनिया के सुखों का आनंद लेने और आध्यात्मिक शांति बनाए रखने के बीच एक सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है। यह उनकी यात्रा का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष था, जहाँ उन्होंने टूटे हुए टुकड़ों को जोड़कर खुद को एक नए सिरे से पाया।
“ईट, प्रे, लव” की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यह कहानी हर उस व्यक्ति से जुड़ती है जो जीवन में कभी न कभी खोया हुआ महसूस करता है। यह सिर्फ यात्रा वृत्तांत नहीं है, बल्कि एक अहसास है कि अपनी खुशी और शांति को प्राथमिकता देना कितना आवश्यक है। 15 साल बाद भी, इस किताब की विरासत उन अनगिनत लोगों में जीवित है, जिन्होंने इसे पढ़कर अपनी खुद की आत्म-खोज की यात्रा शुरू करने का साहस जुटाया। चाहे वह एक नई भाषा सीखना हो, किसी अनजान शहर की यात्रा करना हो, या बस अपने लिए कुछ समय निकालना हो, “ईट, प्रे, लव” हमें याद दिलाता है कि खुद को फिर से खोजने की यात्रा कभी भी और कहीं से भी शुरू हो सकती है।






