
Breaking Today, Digital Desk : गुरुग्राम में हल्की सी बारिश भी अब एक बड़ी आफत बन जाती है। कुछ घंटों की बरसात में ही शहर के कई इलाके पानी में डूब गए, सड़कें दरिया बन गईं और लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। यह कोई नई बात नहीं है, हर साल बारिश के मौसम में गुरुग्राम का यही हाल होता है। लेकिन सवाल यह है कि इस समस्या का जिम्मेदार कौन है और आखिर इसका समाधान कब निकलेगा?
इस बार भी, जब शहर पानी-पानी हुआ, तो कांग्रेस और बीजेपी एक-दूसरे पर आरोप लगाने में जुट गईं। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी सरकार ने पिछले 9 सालों में गुरुग्राम के ड्रेनेज सिस्टम पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसकी वजह से आज ये नौबत आई है। उनके मुताबिक, सरकार ने सिर्फ कागजों पर काम किया है, जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
वहीं, बीजेपी इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। उनका कहना है कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने गुरुग्राम के विकास की नींव ही गलत रखी थी। अंधाधुंध निर्माण की इजाजत दी गई, लेकिन जल निकासी की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। बीजेपी का दावा है कि वे अब इस पुरानी गलती को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इतने सालों की अव्यवस्था को ठीक करने में समय लगेगा।
अब सोचने वाली बात यह है कि इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम जनता का क्या? उन्हें हर साल इस जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है। बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत होती है, नौकरीपेशा लोग दफ्तर नहीं पहुंच पाते और व्यवसाय पर भी बुरा असर पड़ता है। क्या नेताओं को इस बात का एहसास नहीं है कि उनकी इस लड़ाई में नुकसान सिर्फ गुरुग्राम के लोगों का हो रहा है?
जरूरत इस बात की है कि दोनों पार्टियां राजनीति छोड़कर, एक साथ बैठकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें। गुरुग्राम एक महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र है और अगर ऐसे ही हर बारिश में डूबता रहा, तो इसकी छवि पर बुरा असर पड़ेगा। ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने, अतिक्रमण हटाने और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से योजना बनाने की सख्त जरूरत है। जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक गुरुग्राम हर बारिश में ऐसे ही डूबता रहेगा और हम बस एक-दूसरे पर उंगलियां उठाते रहेंगे।






