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मेरी बेटी को भी उड़ान भरने दो, एक भारतीय डॉक्टर का पुरुष-प्रधान समाज को आईना…

Let my daughter fly too, an Indian doctor's mirror to a male-dominated society...

Breaking Today, Digital Desk : आजकल हम सभी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर काफी सोचते हैं, खासकर जब बात उनकी आज़ादी की आती है। ऐसे में एक भारतीय डॉक्टर का अपने पुरुष विशेषाधिकार (male privilege) को लेकर दिया गया संदेश सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। उन्होंने इतनी सहजता से एक बड़ी बात कह दी है, जो हम सबको सोचने पर मजबूर करती है।

डॉक्टर साहब ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे एक पुरुष होने के नाते उन्हें समाज में कुछ ऐसी आज़ादी और सुविधाएँ मिलती हैं, जो शायद एक महिला को नहीं मिलतीं। उन्होंने महसूस किया कि वे रात में बेफिक्र होकर कहीं भी आ-जा सकते हैं, अपनी मर्ज़ी से कपड़े पहन सकते हैं, या अकेले सफर कर सकते हैं – और इन सब बातों पर उन्हें ज़्यादा सोचना नहीं पड़ता। लेकिन जब बात उनकी बेटी की आती है, तो उन्हें चिंता होती है कि क्या उसे भी समाज में उतनी ही आज़ादी और सुरक्षा मिल पाएगी?

उनका कहना है कि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे खुश रहें और अपनी ज़िंदगी पूरी तरह से जिएँ। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी बेटी को उतनी ही आज़ादी देना चाहते हैं, जितनी उन्हें एक पुरुष होने के नाते स्वाभाविक रूप से मिलती है। यह सिर्फ उनकी बेटी की बात नहीं है, बल्कि हर लड़की और महिला को यह हक़ मिलना चाहिए कि वह बिना किसी डर या बंदिश के अपनी मर्ज़ी से जी सके।

यह संदेश सिर्फ पुरुष विशेषाधिकार की बात नहीं करता, बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि कैसे हम अपने घरों से ही बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं। अगर हम अपनी बेटियों को बेटों के बराबर आज़ादी, सम्मान और अवसर देंगे, तभी एक ऐसा समाज बन पाएगा जहाँ हर कोई बेफिक्र होकर जी सके। यह संदेश हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम सचमुच एक ऐसा समाज बना रहे हैं जहाँ हमारी बेटियाँ भी उतनी ही आज़ाद महसूस कर सकें, जितना हम खुद को करते हैं? उम्मीद है कि यह संदेश हम सभी को प्रेरणा देगा और हम इस दिशा में कुछ बेहतर करने की कोशिश करेंगे।

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