
Breaking Today, Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे पर कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग उनके कार्यकाल में ताइवान पर हमला नहीं करेंगे, चीन ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। चीन ने इस मुद्दे को अपना ‘आंतरिक मामला’ बताते हुए कहा है कि ताइवान का मुद्दा चीन और अमेरिका के संबंधों में ‘सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील’ विषय है।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में यह दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनसे वादा किया था कि जब तक वह (ट्रंप) अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, चीन ताइवान पर आक्रमण नहीं करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि शी जिनपिंग ने धैर्य रखने की बात कही थी। ट्रंप का यह बयान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी आगामी बैठक से पहले आया है, जिसमें यूक्रेन युद्ध पर चर्चा होनी है।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ताइवान चीनी क्षेत्र का एक अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “ताइवान का मुद्दा पूरी तरह से चीन का आंतरिक मामला है, और इसका समाधान कैसे किया जाए यह चीनी लोगों का मामला है।” माओ ने यह भी कहा कि चीन शांतिपूर्ण एकीकरण की संभावना के लिए पूरी कोशिश करेगा, लेकिन किसी भी ताकत को ताइवान को चीन से अलग करने की इजाजत नहीं देगा।
चीन हमेशा से ताइवान को अपना अलग हुआ प्रांत मानता रहा है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग कर उसे मुख्य भूमि के साथ मिलाने की बात करता रहा है। वहीं, ताइवान चीन के संप्रभुता के दावों का पुरजोर विरोध करता है।
वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी सरकार से ‘एक-चीन सिद्धांत’ का सम्मान करने का आग्रह किया है। दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने एक बयान में कहा कि अमेरिका को ताइवान से संबंधित मुद्दों को सावधानी से संभालना चाहिए।
इस बीच, ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह अमेरिका और चीन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच होने वाली बातचीत पर करीब से नजर रखता है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि ताइवान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए समान विचारधारा वाले देशों के साथ काम करना जारी रखेगा।




