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क्या कर्नाटक में हिंदू एकत तोड़ने की साज़िश, जाति सर्वेक्षण पर गरमाई राजनीति का सच…

Is there a conspiracy to break Hindu unity in Karnataka? The truth behind the heated politics over caste survey...

Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का जाति सर्वेक्षण (जिसे सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण भी कहा जा रहा है) एक बड़े विवाद का विषय बन गया है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस इस सर्वेक्षण के ज़रिए हिंदुओं को बांटने की कोशिश कर रही है, ताकि 2024 के लोकसभा चुनावों में फायदा उठा सके। ये पूरा मामला क्या है और क्यों इस पर इतना हंगामा हो रहा है, आइए समझते हैं।

विवाद की जड़ क्या है?

दरअसल, ये सर्वेक्षण 2015 में सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू हुआ था। अब जब रिपोर्ट जारी होने वाली है, तो इसमें कई ऐसे आंकड़े सामने आने की बात कही जा रही है, जो कर्नाटक की पारंपरिक जातिगत राजनीति को उलट-पुलट कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें वोक्कालिगा और लिंगायत, जो राज्य के दो प्रमुख और प्रभावशाली समुदाय हैं, उनकी आबादी पहले के अनुमानों से कम बताई गई है। वहीं, दलित और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) की आबादी बढ़ी हुई दिखाई गई है।

भाजपा के आरोप क्या हैं?

भाजपा का कहना है कि कांग्रेस जानबूझकर ये आंकड़े लीक करवा रही है, ताकि समाज में विभाजन पैदा कर सके। वे इसे ‘एंटी-हिंदू’ कदम बता रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर वोक्कालिगा और लिंगायत की आबादी कम दिखाई जाती है, तो उनकी राजनीतिक और सामाजिक हिस्सेदारी पर सवाल उठेंगे, जिससे इन समुदायों में असंतोष फैलेगा। भाजपा इसे कांग्रेस की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति का हिस्सा मान रही है।

कांग्रेस का बचाव क्या है?

कांग्रेस का कहना है कि यह सर्वेक्षण सिर्फ सामाजिक और आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए है, ताकि सरकार बेहतर नीतियां बना सके। उनका दावा है कि इसका मकसद किसी को बांटना नहीं है, बल्कि सभी वर्गों को उनका वाजिब हक दिलाना है। हालांकि, जिस तरह से यह रिपोर्ट राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, उससे कांग्रेस के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है।

आगे क्या हो सकता है?

इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी होने के बाद कर्नाटक की राजनीति में भूचाल आना तय है। अगर आंकड़े लीक हुए रिपोर्ट के मुताबिक ही निकलते हैं, तो वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। भाजपा इसे भुनाने की पूरी कोशिश करेगी और कांग्रेस पर हिंदुओं को बांटने का आरोप और ज़ोर से लगाएगी। 2024 के चुनावों से पहले यह मुद्दा और गरमा सकता है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस स्थिति को कैसे संभालती है और क्या यह सर्वेक्षण वास्तव में उसके लिए फायदे का सौदा साबित होगा या फिर उल्टा पड़ जाएगा।

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