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बुराई पर अच्छाई की जीत, 2025 का दशहरा आपके लिए क्या लाया…

Good triumphs over evil, what does Dussehra 2025 bring for you...

Breaking Today, Digital Desk : दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहते हैं, भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। साल 2025 में दशहरा कब है, इसका शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन क्या-क्या रस्में निभाई जाती हैं, आइए जानते हैं।

दशहरा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
साल 2025 में दशहरा 30 सितंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा।

  • दशमी तिथि प्रारंभ: 29 सितंबर 2025 को रात 10 बजकर 25 मिनट से

  • दशमी तिथि समाप्त: 30 सितंबर 2025 को रात 11 बजकर 07 मिनट तक

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त:

  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 09 मिनट से दोपहर 02 बजकर 56 मिनट तक

  • अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 01 बजकर 22 मिनट से दोपहर 03 बजकर 43 मिनट तक

दशहरे का महत्व
दशहरा का त्योहार कई मायनों में खास है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम ने लंकापति रावण का वध कर सीता माता को उसकी कैद से छुड़ाया था। इसलिए यह असत्य पर सत्य की और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।

वहीं, एक और मान्यता के अनुसार, इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। इसलिए इसे विजयादशमी के रूप में भी मनाया जाता है, जो नारी शक्ति के शौर्य और विजय का प्रतीक है।

दशहरे की रस्में और पूजा विधि
दशहरे के दिन जगह-जगह रावण के पुतले जलाए जाते हैं, जो बुराई के अंत का प्रतीक है। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और मिठाइयां बांटते हैं। इस दिन शस्त्र पूजा का भी विशेष महत्व है।

पूजा विधि:

  1. दशहरे के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. घर के मंदिर में भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें।

  3. भगवान को फल, फूल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें।

  4. इस दिन शमी के पेड़ की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।

  5. शाम के समय रावण दहन के कार्यक्रमों में शामिल हों।

यह त्योहार हमें सिखाता है कि कितनी भी बड़ी बुराई क्यों न हो, अंत में जीत हमेशा अच्छाई की ही होती है।

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