
Breaking Today, Digital Desk : वैश्विक राजनीति के जटिल मंच पर, जहाँ हर निर्णय का गहरा असर होता है, अक्सर यह माना जाता है कि बड़े फैसले सिर्फ राष्ट्राध्यक्ष और उनके सलाहकार ही लेते हैं। लेकिन कई बार, परदे के पीछे कुछ ऐसी शख्सियतें भी होती हैं, जिनकी खामोश सलाह भी बड़ी से बड़ी नीतियों का रुख मोड़ देती है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में उनकी पत्नी मेलानिया ट्रम्प ने कुछ ऐसी ही भूमिका निभाई, खासकर सीरिया और यूक्रेन जैसे संवेदनशील मामलों में।
यह बात कई रिपोर्टों में सामने आई है कि मेलानिया, जो सार्वजनिक रूप से अक्सर कम बोलती थीं, ने महत्वपूर्ण क्षणों में ट्रम्प के विचारों को प्रभावित किया। यूक्रेन के मामले में तो यह प्रभाव और भी स्पष्ट रूप से दिखा। जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो शुरुआत में ट्रम्प ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को “स्मार्ट” और “जीनियस” तक कह डाला था। इसी दौरान, मेलानिया ने सोशल मीडिया पर यूक्रेन के “निर्दोष लोगों” के लिए दुख जताते हुए इसे “दिल तोड़ने वाला और भयावह” बताया और रेड क्रॉस के लिए दान की अपील की।
ट्रम्प ने खुद इस बात का जिक्र किया है कि कैसे मेलानिया ने उन्हें यूक्रेन की पीड़ा से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जब वह पुतिन से अपनी “शानदार बातचीत” का जिक्र अपनी पत्नी से करते, तो मेलानिया उन्हें याद दिलातीं कि रूस के हवाई हमलों में और शहर तबाह हो रहे हैं। माना जाता है कि इसी के चलते ट्रम्प ने यूक्रेन को हथियार भेजने के अपने पिछले रुख को बदलते हुए कीव को मिसाइल डिफेंस सिस्टम देने की मंजूरी दी।
मेलानिया का यह रुख उनके अतीत से भी जुड़ा है। उनका जन्म और पालन-पोषण पूर्व यूगोस्लाविया में हुआ था, एक ऐसा क्षेत्र जिसने सोवियत संघ के प्रभाव को करीब से देखा और महसूस किया था। इसी पृष्ठभूमि के कारण वह यूक्रेन के दर्द को शायद बेहतर समझ पा रही थीं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उन्हें मजाकिया अंदाज में “एजेंट मेलानिया ट्रंपेंको” तक कहना शुरू कर दिया, जो यूक्रेन के प्रति उनके समर्थन को दर्शाता है।
सिर्फ यूक्रेन ही नहीं, 2017 में सीरिया को लेकर भी ट्रम्प के कड़े फैसले के पीछे मेलानिया का हाथ माना जाता है। जब सीरिया में बशर अल-असद शासन द्वारा रासायनिक हथियारों से बच्चों पर हमला किया गया, तो उन तस्वीरों ने दुनिया को झकझोर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन तस्वीरों का मेलानिया पर गहरा असर हुआ और उन्होंने ट्रम्प को इस पर सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद ही ट्रम्प ने सीरियाई एयरबेस पर मिसाइल हमले का आदेश दिया, जो उनकी विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव था।
यह घटनाएं दिखाती हैं कि व्हाइट हाउस के बंद दरवाजों के पीछे, फर्स्ट लेडी की भूमिका सिर्फ औपचारिक नहीं होती। मेलानिया ट्रम्प ने यह साबित किया कि एक “खामोश ताकत” के रूप में भी वैश्विक मंच पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला जा सकता है और इतिहास की दिशा को मोड़ा जा सकता है।



