
Breaking Today, Digital Desk : हाल के दिनों में भारत की राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा की चर्चाओं में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। इस अभियान को ‘नए भारत’ के उदय और ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति के एक सशक्त प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न मंचों से इस ऑपरेशन को भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और सैन्य सामर्थ्य का प्रमाण बताया है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को न केवल एक सफल सैन्य अभियान के तौर पर देखा जा रहा है, बल्कि इसे एक ऐसे कदम के रूप में भी प्रस्तुत किया जा रहा है जो यह दर्शाता है कि नया भारत अपने दुश्मनों को उनके घर में घुसकर सबक सिखाने का साहस और क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जो भी भारत पर बुरी नजर डालेगा, उसे पाताल से भी खोजकर खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने इस ऑपरेशन की सफलता का श्रेय 140 करोड़ देशवासियों की एकता को दिया है।
विपक्ष द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग इस सफलता को पचा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है और सिंदूर को तमाशा कहना देश की भावनाओं का अपमान है।
यह ऑपरेशन भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी हथियारों की बढ़ती ताकत को भी रेखांकित करता है। दुनिया भर में ‘मेड इन इंडिया’ रक्षा प्रणालियों की चर्चा हो रही है, जो भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति को दर्शाती है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक ऐसी निर्णायक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को और भी मजबूती से स्थापित किया है।
‘नए भारत’ की अवधारणा, जिसमें ‘राष्ट्र प्रथम’ को सर्वोपरि रखा गया है, इस तरह के अभियानों से और भी पुष्ट होती है। यह इस बात का संदेश है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और भारत अपने नागरिकों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।




