
Breaking Today, Digital Desk : 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब पूरा देश जश्न में डूबा था, तब राजधानी दिल्ली में एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अनुपस्थिति ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे एक राष्ट्रीय उत्सव का अपमान बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में जहां सभी प्रमुख नेता और गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे, वहीं विपक्ष के दो सबसे बड़े चेहरों की कुर्सियाँ खाली रहीं। इस घटनाक्रम पर भाजपा ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और इसे कांग्रेस का अहंकार और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति असम्मान करार दिया। भाजपा प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि मोदी विरोध में कांग्रेस अब देश का विरोध करने पर उतर आई है। पार्टी ने इस अनुपस्थिति को “सिंदूर का अपमान” जैसी तीखी उपमा देते हुए कहा कि यह देश के लिए शुभ और पवित्र दिन पर कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति का प्रतीक है।
हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। बताया गया कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित ध्वजारोहण समारोह में हिस्सा लिया, जहां वे अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बारिश में भीगते हुए राष्ट्रगान गाते नजर आए। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लाल किले के कार्यक्रम में शामिल न होने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन पिछले साल बैठने की व्यवस्था को लेकर नाराजगी जैसी बातें भी चर्चा में हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने स्वतंत्रता दिवस के दिन भी राजनीतिक तापमान को बढ़ाए रखा। एक ओर जहाँ भाजपा इसे कांग्रेस की संवैधानिक कर्तव्य की अवहेलना और देश का अपमान बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे भाजपा द्वारा हर मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश के तौर पर पेश कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते अविश्वास को दर्शाती हैं, जिसका असर राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों पर भी दिखने लगा है।






