
Breaking Today, Digital Desk : दिल्ली की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार किसी कैदी के भागने या गैंगवार की वजह से नहीं, बल्कि एक इंजीनियर पर हुए जानलेवा हमले को लेकर। यह घटना कई सवाल खड़े करती है कि आखिर तिहाड़ जैसी हाई-सिक्योरिटी जेल के अंदर भी लोग सुरक्षित क्यों नहीं हैं?
क्या हुआ था उस दिन?
यह घटना कुछ दिन पहले की है जब तिहाड़ जेल नंबर 4 में बंद इंजीनियर राशिद पर कुछ कैदियों ने जानलेवा हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि राशिद को गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हमलावरों ने लोहे की रॉड और अन्य नुकीली चीजों से वार किए, जिससे राशिद की जान को खतरा हो गया था।
हमले के पीछे की वजह
अभी तक हमले के पीछे की असली वजह सामने नहीं आई है, लेकिन शुरुआती जांच में यह गैंगवार या आपसी रंजिश का मामला लग रहा है। तिहाड़ जेल में अक्सर कैदियों के गुटों के बीच झड़पें होती रहती हैं, और कई बार ये झड़पें जानलेवा हमलों में बदल जाती हैं। सवाल यह है कि जेल प्रशासन इन घटनाओं को रोकने में नाकाम क्यों रहा है?
तिहाड़ की सुरक्षा पर सवाल
यह कोई पहली घटना नहीं है जब तिहाड़ जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। पहले भी यहां से कैदियों के भागने, गैंगवार और कैदियों के बीच झड़पों की खबरें आती रही हैं। ऐसे में यह घटना एक बार फिर इस बात पर जोर देती है कि तिहाड़ जेल की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। सीसीटीवी कैमरे, जेल स्टाफ की निगरानी और कैदियों की नियमित तलाशी जैसी चीजें ठीक से काम क्यों नहीं कर रही हैं?
आगे क्या?
इस मामले में जांच शुरू हो गई है और उम्मीद है कि जल्द ही हमलावरों को पहचान लिया जाएगा। लेकिन, यह घटना सिर्फ एक हमला नहीं है, बल्कि यह तिहाड़ जेल की लचर सुरक्षा व्यवस्था का एक और सबूत है। प्रशासन को इस घटना को गंभीरता से लेना चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।




