
Breaking Today, Digital Desk : आज से करीब 20 साल पहले की बात है. भारतीय राजनीति के एक दिग्गज और बीजेपी के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी पाकिस्तान के दौरे पर गए थे. यह दौरा अपने आप में ऐतिहासिक था, लेकिन जो बात इस दौरे के दौरान हुई, उसने आडवाणी जी के राजनीतिक जीवन की दिशा ही बदल दी. उन्होंने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ कर दी. बस, फिर क्या था, पूरे देश में एक नई बहस छिड़ गई, जिसने आडवाणी के राजनीतिक करियर पर गहरा असर डाला.
क्या कहा था आडवाणी ने?
बात 2005 की है, जब आडवाणी कराची में जिन्ना की मज़ार पर गए थे. वहां उन्होंने विजिटर्स बुक में लिखा कि जिन्ना एक महान व्यक्ति थे, जिन्होंने धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों में विश्वास किया. उन्होंने जिन्ना को “धर्मनिरपेक्ष” बता दिया. यह बात उस समय के राजनीतिक माहौल में किसी बड़े झटके से कम नहीं थी, खासकर आडवाणी जैसे नेता के लिए, जिनकी पहचान एक हिंदुत्ववादी चेहरे के तौर पर थी.
देश में तूफान और पार्टी के अंदर बेचैनी
जैसे ही यह खबर भारत पहुंची, हंगामा मच गया. बीजेपी के भीतर और बाहर, हर जगह इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं. जहां एक तरफ संघ परिवार और बीजेपी के कई नेता इस बयान से असहज और नाराज़ थे, वहीं विपक्ष को आडवाणी पर हमला बोलने का एक बड़ा मौका मिल गया. संघ और बीजेपी का मानना था कि जिन्ना भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार थे, और ऐसे में उनकी तारीफ करना पार्टी की विचारधारा के खिलाफ था.
आडवाणी जी पर दबाव बढ़ता गया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें बीजेपी अध्यक्ष पद से इस्तीफा तक देना पड़ा. हालांकि बाद में उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया, लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया कि पार्टी और संघ इस मुद्दे पर कितनी गंभीरता से सोच रहे थे.
बदल गया राजनीतिक समीकरण
इस घटना ने आडवाणी के राजनीतिक भविष्य को काफी प्रभावित किया. माना जाता है कि इसी के बाद से उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा. जो आडवाणी कभी बीजेपी के निर्विवाद नेता और प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जाते थे, इस घटना के बाद उनकी स्थिति कमजोर होने लगी. पार्टी में उनकी पकड़ पहले जैसी नहीं रही और धीरे-धीरे नई पीढ़ी के नेताओं का उदय होने लगा.
यह घटना भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी. इसने दिखाया कि कैसे एक बयान किसी बड़े नेता के राजनीतिक करियर को किस हद तक प्रभावित कर सकता है. आडवाणी का जिन्ना पर दिया गया वो बयान आज भी भारतीय राजनीति में एक मिसाल के तौर पर याद किया जाता है, जब एक दिग्गज नेता ने अपनी राजनीतिक किस्मत को एक झटके में बदल दिया था. `






