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जयशंकर ने राहुल गांधी को घेरा, ‘कांग्रेस के दौर’ और ‘मोदी के दौर’ का फर्क समझाया…

Jaishankar cornered Rahul Gandhi, explained the difference between 'Congress era' and 'Modi era'

Breaking Today, Digital Desk : भारत की चीन नीति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव एक बार फिर गहरा गया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए, चीन से निपटने के दो अलग-अलग तरीकों को “कांग्रेस का सामान्य” और “मोदी का सामान्य” कहकर परिभाषित किया है. यह विवाद दोनों दलों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर दृष्टिकोण के गहरे अंतर को उजागर करता है.

एक साक्षात्कार और विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर, जयशंकर ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकारें चीन सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास को यह सोचकर नजरअंदाज करती थीं कि इससे चीनी आक्रामकता को रोकने में मदद मिलेगी. उन्होंने इस दृष्टिकोण को “कांग्रेस का सामान्य” बताया, जहां दशकों तक सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का निर्माण नहीं हुआ. इसके विपरीत, उन्होंने “मोदी के सामान्य” को परिभाषित करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने सीमा पर बुनियादी ढांचे के बजट को कई गुना बढ़ाया है और चीन की तैनाती के जवाब में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय सैनिकों की भारी तैनाती सुनिश्चित की है.

जयशंकर ने विशेष रूप से पैंगोंग झील पर चीन द्वारा बनाए गए एक पुल के मुद्दे पर राहुल गांधी की आलोचना का जवाब दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस क्षेत्र में पुल बनाया गया है, उस पर चीन ने 1962 के युद्ध के दौरान कब्जा कर लिया था. उनका तर्क था कि दशकों पुराने कब्जे के लिए आज मोदी सरकार को दोष देना या तो अज्ञानता है या जानबूझकर स्थिति को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश है

विदेश मंत्री ने 2017 के डोकलाम गतिरोध की घटना को भी याद दिलाया, जब राहुल गांधी पर भारत सरकार से जानकारी लेने के बजाय चीनी राजदूत से ब्रीफिंग लेने का आरोप लगा था.

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार की चीन नीति को कमजोर और प्रतिक्रियाशील बताते रहे हैं. उनका आरोप है कि विदेश मंत्री जयशंकर चीन से मिल रही चुनौती की गंभीरता को नहीं समझते राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान की भी आलोचना की है जिसमें उन्होंने कहा था कि “किसी ने भी भारतीय क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया है”. राहुल गांधी ने सैनिकों के बीच हुई झड़पों का जिक्र करते हुए “पिटाई” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर एस. जयशंकर ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सीमा पर तैनात सैनिकों का अपमान बताया.

यह जुबानी जंग दिखाती है कि लद्दाख में 2020 के गतिरोध के बाद से चीन का मुद्दा भारतीय राजनीति के केंद्र में बना हुआ है. जहां सरकार अपनी मजबूत और ढांचागत विकास पर केंद्रित नीति को “नया सामान्य” बता रही है, वहीं विपक्ष इसे नाकाफी और दिशाहीन करार दे रहा है.

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