
Breaking Today, Digital Desk : बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने हाल ही में यह दावा कर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में वह चुनाव कैसे लड़ेंगे। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने उनके दावों का तुरंत खंडन करते हुए कहा कि उनका नाम मतदाता सूची में क्रम संख्या 416 पर दर्ज है। इस घटना ने एक महत्वपूर्ण सवाल को जन्म दिया है: यदि किसी उम्मीदवार का नाम वास्तव में मतदाता सूची से गायब हो जाए, तो क्या वह चुनाव लड़ने के योग्य है?
क्या कहता है भारत का कानून?
भारत में चुनाव संबंधी नियम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत संचालित होते हैं इस कानून के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को लोकसभा या राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए भारत के किसी भी संसदीय क्षेत्र में एक पंजीकृत मतदाता होना अनिवार्य है। इसका मतलब यह है कि उम्मीदवार का नाम देश की किसी न किसी मतदाता सूची में होना आवश्यक है। यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में बिल्कुल भी नहीं है, तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य है
यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि उम्मीदवार को उसी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होने की आवश्यकता नहीं है जहां से वह चुनाव लड़ रहा है (कुछ विशेष आरक्षित सीटों को छोड़कर)। उदाहरण के लिए, दिल्ली में पंजीकृत मतदाता उत्तर प्रदेश के किसी भी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता है, जब तक कि वह अन्य सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करता हो।
तेजस्वी यादव का मामला और आगे का विवाद
निर्वाचन आयोग द्वारा तेजस्वी यादव के दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताए जाने के बाद, यह मामला और भी जटिल हो गया जब दो मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नंबरों का मुद्दा सामने आया। तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस EPIC नंबर (RAB2916120) का जिक्र किया था, वह निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में नहीं मिला। आयोग ने स्पष्ट किया कि उनका नाम एक अलग EPIC नंबर (RAB0456228) के साथ पंजीकृत है, जिसका उपयोग उन्होंने 2020 के चुनावों में भी किया था। एक से अधिक वोटर आईडी कार्ड रखना एक कानूनी मुद्दा हो सकता है, जिसकी जांच की जा सकती है।
संक्षेप में, तेजस्वी यादव का नाम मतदाता सूची में होने के कारण उनके चुनाव लड़ने पर कोई रोक नहीं है। हालांकि, उनका शुरुआती दावा एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू को उजागर करता है कि भारतीय लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए एक पंजीकृत मतदाता होना एक गैर-परक्राम्य शर्त है।






