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वाराणसी में बाढ़ का कहर, घाटों से सड़कों तक पानी ही पानी, जनजीवन अस्त-व्यस्त…

Flood havoc in Varanasi, Water everywhere from ghats to roads, normal life disrupted

Breaking Today, Digital Desk : उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे शहर के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रसिद्ध नमो घाट से लेकर महाश्मशान मणिकर्णिका घाट तक सभी 84 घाट जलमग्न हो गए हैं, और अब पानी रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहा है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई सड़कों पर हैं, जो शहर में अभूतपूर्व स्थिति को दर्शाता है।

गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और सोमवार सुबह यह खतरे के निशान 71.262 मीटर से काफी ऊपर 72.03 मीटर पर बह रही थी। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, नदी का जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटों में 57 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है, और इस दौरान रुक-रुक कर हो रही बारिश ने स्थिति को और खराब कर दिया है।

बाढ़ का पानी अब घाटों से आगे बढ़कर शहर के मोहल्लों और गांवों में घुस गया है। जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ से शहर के 24 मोहल्ले और 44 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं, जिससे एक लाख से अधिक की आबादी पर असर पड़ा है। हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है और प्रशासन ने 20 राहत शिविर स्थापित किए हैं।

शहर के प्रतिष्ठित घाटों का नज़ारा पूरी तरह बदल गया है। नमो घाट को पहली बार पूरी तरह से बंद करना पड़ा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट, जहां अंतिम संस्कार किए जाते हैं, पूरी तरह से डूब गए हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार घाटों की छतों और आस-पास की गलियों में करने पड़ रहे हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नावों के शवों को श्मशान घाट की छतों तक पहुंचाया जा रहा है, जिसके लिए नाविक अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं।

गंगा में उफान के कारण वरुणा नदी में भी पलट प्रवाह हो रहा है, जिससे दो दर्जन से अधिक कॉलोनियां जलमग्न हो गई हैं। अस्सी घाट और संकटमोचन मंदिर के आसपास के इलाकों में भी पानी भर गया है, जिससे यातायात बाधित हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की है और स्थानीय प्रशासन को प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया है। एनडीआरएफ, जल पुलिस और स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं।

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