प्रयागराज की बाढ़ एक पुलिसवाले की आस्था या सोशल मीडिया का स्टंट…
Prayagraj flood: A policeman's faith or a social media stunt

Breaking Today, Digital Desk : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हाल ही में आई बाढ़ ने जहां हजारों लोगों के लिए मुसीबतें खड़ी कर दीं, वहीं एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर (एसआई) के लिए यह ‘माँ गंगा का आशीर्वाद’ बन गई. एसआई चंद्रदीप निषाद उस वक्त सुर्खियों में आ गए जब उन्होंने अपने बाढ़ग्रस्त घर में गंगा का स्वागत पूजा-अर्चना के साथ किया. उनके वीडियो, जिसमें वे घर के दरवाजे पर बहते पानी को दूध और फूल चढ़ाते, पानी में डुबकी लगाते और यहां तक कि अपनी छत से बाढ़ के पानी में छलांग लगाते नजर आ रहे हैं, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए.
इन वीडियो ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है: क्या यह एक भक्त की अपनी आराध्य नदी के प्रति सच्ची आस्था है या फिर यह सिर्फ ध्यान आकर्षित करने का एक जरिया है?
कौन हैं एसआई चंद्रदीप निषाद?
एसआई चंद्रदीप निषाद प्रयागराज के दारागंज इलाके के रहने वाले हैं और वर्तमान में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज के निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) के पद पर तैनात हैं. दिलचस्प बात यह है कि निषाद सिर्फ एक पुलिस अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक पूर्व राष्ट्रीय स्तर के तैराक भी हैं. उन्होंने कई बार स्वीमिंग में यूपी पुलिस का प्रतिनिधित्व किया है. उनका कहना है कि गंगा ने उनके जीवन में बहुत बड़ा योगदान दिया है और उन्होंने इसी नदी में तैरना सीखा, जिसकी बदौलत उन्हें पुलिस बल में खेल कोटे से नौकरी मिली.
आस्था और आभार का अनूठा प्रदर्शन
जब गंगा नदी का पानी प्रयागराज के निचले इलाकों में भर गया और निषाद के घर में भी दाखिल हो गया, तो उन्होंने घबराने की बजाय इसे एक शुभ अवसर माना. उन्होंने वर्दी में ही अपने घर की देहरी पर बाढ़ के पानी की पूजा की और कहा, “मैं धन्य हो गया माँ, आप मेरे दरवाजे पर दस्तक देने आईं.” इसके बाद के वीडियो में वे घर के अंदर कमर तक भरे पानी में डुबकी लगाते हुए कहते हैं कि करोड़ों लोग महाकुंभ में स्नान के लिए जाते हैं, लेकिन गंगा मैया खुद उन्हें आशीर्वाद देने उनके घर आई हैं.
उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर छलांग लगाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया और साथ में चेतावनी भी दी कि लोग इसका अनुकरण न करें क्योंकि वह एक प्रशिक्षित तैराक हैं. एक अन्य वीडियो में वह अपनी दो बेटियों के साथ पानी में कूदते नजर आए, जिसके कैप्शन में लिखा, “हमारी छोरियां छोरों से कम हैं के?”
भक्ति और व्यंग्य की दोहरी व्याख्या
एसआई निषाद के इन कार्यों पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं. कई लोग इसे उनकी अटूट भक्ति और सकारात्मकता का प्रतीक मान रहे हैं. उनका मानना है कि ऐसी आपदा की स्थिति में भी निषाद ने ईश्वर के प्रति अपनी आस्था को बनाए रखा.
वहीं, एक बड़ा वर्ग इसे ‘रील बाजी’ या व्यवस्था पर एक तरह का व्यंग्य मान रहा है. आलोचकों का कहना है कि जब शहर बाढ़ से त्रस्त है और लोग विस्थापित हो रहे हैं, तब एक पुलिस अधिकारी का इस तरह से वीडियो बनाना असंवेदनशील है. कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह उनकी हताशा को व्यक्त करने का एक व्यंग्यात्मक तरीका है, जिसमें वे दिखा रहे हैं कि जब व्यवस्था विफल हो जाती है, तो केवल आस्था ही बचती है.
चाहे जो भी हो, एसआई चंद्रदीप निषाद की कहानी ने बाढ़ की विनाशकारी खबरों के बीच लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है और आस्था, कर्तव्य और सोशल मीडिया के दौर में हमारे व्यवहार को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं.






