
Breaking Today, Digital Desk : चुनाव आयोग ने एक और कमाल कर दिया है। अभी कुछ दिन पहले ही खबर आई थी कि उन्होंने 300 से ज़्यादा ऐसी राजनीतिक पार्टियों को लिस्ट से बाहर कर दिया है, जो सिर्फ कागजों पर चल रही थीं। और अब एक और बड़ा फैसला! चुनाव आयोग ने 474 और पार्टियों को ‘डिलिस्ट’ कर दिया है। यानी, कुल मिलाकर अब तक 808 ऐसी पार्टियां लिस्ट से हटाई जा चुकी हैं, जिनका कोई अता-पता ही नहीं था। ये पार्टियां न तो चुनाव लड़ रही थीं, न इनकी कोई मीटिंग होती थी और न ही ये चुनाव आयोग को अपनी कोई रिपोर्ट भेज रही थीं। सीधे शब्दों में कहें तो ये सिर्फ नाम की पार्टियां थीं।
सोचिए, देश में कितनी पार्टियां होंगी? रजिस्टर्ड तो हजारों हैं, लेकिन उनमें से आधी से ज्यादा तो सिर्फ इसलिए बनी हुई थीं ताकि लोग उनके नाम पर कुछ फायदा उठा सकें। चुनाव आयोग ने इन पार्टियों पर ये कार्रवाई इसलिए की है क्योंकि इन्होंने लगातार नियमों का उल्लंघन किया है। न तो ये चुनाव लड़ती थीं और न ही इन्होंने कभी कोई आर्थिक जानकारी आयोग को दी। असल में, आयोग ये देखना चाहता है कि कौन सी पार्टियां वाकई सक्रिय हैं और कौन सी सिर्फ नाम की।
ये ‘सफाई अभियान’ एक बहुत अच्छा कदम है। इससे राजनीतिक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और जो पार्टियां वाकई काम कर रही हैं, उन्हें अपनी जगह बनाने का मौका मिलेगा। अब जब इतनी सारी ‘फर्जी’ पार्टियां लिस्ट से बाहर हो गई हैं, तो उम्मीद है कि आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया और भी ज्यादा साफ-सुथरी हो पाएगी। ये दिखाता है कि चुनाव आयोग अब चीजों को हल्के में नहीं ले रहा है और वो देश की राजनीति को और बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।






