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200 करोड़ का दिमाग और किसानों का भला, गडकरी की इथेनॉल क्रांति…

200 crore rupees worth of brain and benefit of farmers, Gadkari's ethanol revolution...

Breaking Today, Digital Desk : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं, और हाल ही में उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। उन्होंने कहा कि उनके दिमाग़ की क़ीमत 200 करोड़ रुपये है! यह बात उन्होंने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कही, जब वे इथेनॉल को बढ़ावा देने के पीछे की अपनी सोच साझा कर रहे थे।

गडकरी जी ने साफ़ किया कि इथेनॉल को बढ़ावा देने का उनका मुख्य उद्देश्य किसानों का कल्याण है, न कि कोई आर्थिक लाभ कमाना। उन्होंने बताया कि कैसे पराली और दूसरे कृषि अपशिष्टों से इथेनॉल बनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और साथ ही प्रदूषण की समस्या से भी निजात मिल सकती है।

उन्होंने इथेनॉल को पेट्रोल के विकल्प के तौर पर देखने की बात की और कहा कि इससे देश का कच्चा तेल आयात बिल भी कम होगा। उनके मुताबिक, आज भारत को कच्चे तेल के आयात पर हर साल लगभग 16 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अगर हम इथेनॉल जैसे स्वदेशी विकल्पों पर ध्यान दें तो यह पैसा देश में ही रहेगा और किसानों की जेब भरेगा।

गडकरी ने यह भी बताया कि कैसे फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि लोग इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियाँ चला सकें। उनका विजन साफ है: किसानों को ‘अन्नदाता’ से ‘ऊर्जादाता’ बनाना। उनका कहना है कि अगर इस देश का किसान खुशहाल होगा, तो देश अपने आप तरक्की करेगा।

तो अगली बार जब आप नितिन गडकरी को इथेनॉल की बात करते हुए सुनें, तो याद रखिएगा कि इसके पीछे सिर्फ़ एक आर्थिक नीति नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में बदलाव लाने का एक बड़ा सपना है – और हाँ, एक 200 करोड़ का दिमाग़ भी!

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