
Breaking Today, Digital Desk : यूक्रेन में चल रहे विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की इच्छा तो तीनों प्रमुख वैश्विक नेता- यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रखते हैं, लेकिन उनकी शांति की राहें एक दूसरे से बिलकुल अलग हैं. इन तीनों के भिन्न दृष्टिकोण और शर्तों के कारण यह महत्वपूर्ण सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह संघर्ष युद्धविराम पर थमेगा या किसी स्थायी शांति समझौते तक पहुंच पाएगा.
ट्रंप का सीधा शांति समझौते पर जोर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस जटिल मुद्दे पर एक सीधे और त्वरित शांति सौदे के पक्ष में हैं. उन्होंने युद्धविराम को केवल एक अस्थायी उपाय बताते हुए उसे प्राथमिकता नहीं दी है. ट्रंप ने पुतिन और ज़ेलेंस्की दोनों के साथ बैठकें की हैं और उनका मानना है कि एक स्थायी शांति समझौता ही लड़ाई को जड़ से खत्म करने का सबसे बेहतर तरीका है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप के शांति प्रस्ताव में यह शामिल हो सकता है कि यूक्रेन कुछ क्षेत्रों पर अपना दावा छोड़ दे. साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन की नाटो सदस्यता और क्रीमिया की वापसी किसी भी समझौते का हिस्सा नहीं होगी. ट्रंप ने ज़ेलेंस्की और पुतिन के बीच एक शिखर सम्मेलन का भी प्रस्ताव रखा है.
पुतिन की अपनी सख्त शर्तें
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शांति के लिए तैयार तो दिखते हैं, लेकिन केवल अपनी शर्तों पर. उनकी सबसे प्रमुख मांग पूर्वी डोनबास क्षेत्र (डोनेट्स्क और लुहान्स्क) का पूर्ण नियंत्रण हासिल करना है. इसके बदले में, वे दक्षिणी खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया में मौजूदा मोर्चे को स्थिर करने के लिए सहमत हो सकते हैं. पुतिन के लिए यूक्रेन का तटस्थ रहना, यानी नाटो में शामिल न होना, एक और महत्वपूर्ण और गैर-समझौता वाली शर्त है. इसके अलावा, वह यूक्रेन में रहने वाली रूसी भाषी आबादी के सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी भी चाहते हैं.
ज़ेलेंस्की का संप्रभुता पर अटूट रुख
दूसरी ओर, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की अपने देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई भी समझौता करने को तैयार नहीं हैं. उनके लिए शांति का मतलब 1991 की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं की बहाली है. ज़ेलेंस्की एक तत्काल और पूर्ण युद्धविराम को शांति वार्ता की पहली और सबसे आवश्यक सीढ़ी मानते हैं. उनकी 10-सूत्रीय शांति योजना में सभी रूसी सैनिकों की वापसी, युद्धबंदियों की रिहाई और यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता की पूर्ण बहाली शामिल है. ज़ेलेंस्की ने अपनी तीन प्रमुख शर्तें भी स्पष्ट की हैं: यूक्रेन के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी, अपनी सेना को मजबूत करने की पूर्ण स्वतंत्रता और शांति स्थापित होने के बाद देश में चुनाव कराना.
युद्धविराम बनाम शांति समझौता: एक बड़ा पेंच
यह पूरा मामला युद्धविराम और शांति समझौते के बीच के मूलभूत अंतर पर आकर अटक गया है. जहां ज़ेलेंस्की और उनके यूरोपीय सहयोगी पहले लड़ाई को पूरी तरह से रोकना चाहते हैं ताकि बातचीत के लिए एक स्थिर और विश्वसनीय आधार मिल सके, वहीं ट्रंप और पुतिन सीधे एक स्थायी सौदे पर पहुंचने की वकालत कर रहे हैं. कई विश्लेषकों का मानना है कि रूस सीधे शांति समझौते की आड़ में अपनी मौजूदा सैन्य बढ़त का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है.
इन तीनों शक्तिशाली नेताओं की अलग-अलग प्राथमिकताओं और एक-दूसरे से टकराती शर्तों के बीच, यूक्रेन में शांति का मार्ग अत्यंत जटिल और अनिश्चित बना हुआ है. यह देखना अभी बाकी है कि कूटनीति का यह ऊंट आखिर किस करवट बैठता है और क्या इस युद्ध का अंत निकट भविष्य में संभव है.




