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मुख्यमंत्री योगी की पहल से नून नदी में फिर लौटी धार, हरियाली और उम्मीदें

लखनऊ/कानपुर, 15 जुलाई 2025 – उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर शुरू की गई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “एक जिला – एक नदी” योजना अब परिणाम देने लगी है। इसका सबसे प्रभावशाली उदाहरण है कानपुर नगर की नून नदी, जो वर्षों तक उपेक्षा, अतिक्रमण और प्रदूषण के चलते लगभग लुप्तप्राय हो चुकी थी। लेकिन अब, यह नदी न केवल फिर से बहने लगी है, बल्कि इसके दोनों किनारों पर हरियाली, जनजीवन और उम्मीदों की नई धारा भी फूट पड़ी है।भूली-बिसरी नदी को मिला नया जीवन कभी कानपुर नगर के बिल्हौर, चौबेपुर और शिवराजपुर क्षेत्रों की जीवनरेखा मानी जाने वाली नून नदी अब बीते दिनों की बात नहीं, बल्कि पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुकी है। यह नदी वर्षों से गाद, जलकुंभी, प्रदूषण और अतिक्रमण की मार झेल रही थी। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू हुए “एक जिला – एक नदी” अभियान ने इसे नई पहचान और गति दी।प्रशासन, जनता और श्रमदान ने मिलकर किया कमाल नदी के पुनर्जीवन में सबसे अहम भूमिका रही प्रशासनिक सक्रियता और सामूहिक सहभागिता की। कानपुर नगर के जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह और मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन के नेतृत्व में यह पहल सिर्फ सरकारी योजना न रहकर एक जनआंदोलन बन गई। करीब 6,000 श्रमिकों ने 58 ग्राम पंचायतों से जुड़कर नदी की गहराई से सफाई और खुदाई का कार्य किया। लगभग 23 किलोमीटर की दूरी में गाद निकासी और तटबंध निर्माण किया गया। इस कार्य में ₹57 लाख की लागत आई और 23,000 से अधिक मानव दिवसों का सृजन हुआ। खुदाई के लिए अधिकतर कार्य मशीनों की बजाय मानव श्रम से किया गया, जिससे संवेदनशीलता और सहभागिता दोनों बनी रही। तकनीक और परंपरा का अनूठा मेल नदी का पुराना मार्ग खोजने के लिए एक साथ कई तरीकों का उपयोग किया गया: ड्रोन सर्वेक्षण और सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए नदी की वास्तविक धारा की पहचान हुई। राजस्व अभिलेखों और ग्रामीण बुजुर्गों की स्मृतियों से दिशा और विस्तार की पुष्टि की गई इसके बाद मनरेगा के तहत पुनर्जीवन कार्य की शुरुआत की गई। हरियाली और जीवनदायिनी वातावरण की वापसी नदी की सिर्फ सफाई नहीं हुई, बल्कि इसे फिर से समाज और प्रकृति के साथ जोड़ा गया। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप, नदी के किनारों को हरित पट्टी में बदला गया: जुलाई के पहले सप्ताह में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत 40,000 से अधिक पौधे लगाए गए। इसमें नीम, पीपल, पाकड़, सहजन जैसे पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण पेड़ शामिल हैं। ये पेड़ जल संरक्षण, मृदा स्थिरीकरण और स्थानीय जैव विविधता को संबल देंगे। अब कन्हैया ताल के किनारे सन्नाटा नहीं, पानी की कलकल, बच्चों की किलकारी, और प्रकृति की चहक सुनाई देती है। ग्रामीण वहां सुबह-शाम टहलते हैं, पौधों की देखभाल करते हैं, और इस परिवर्तन को अपनी आंखों से होते देख गर्व महसूस करते हैं। प्रदूषण पर नियंत्रण, उद्योगों को चेतावनी नदी को पुनर्जीवित करते समय एक बड़ा कदम यह भी रहा कि: स्थानीय फैक्ट्रियों से आने वाला प्रदूषित जल पूरी तरह बंद करवाया गया। संबंधित इकाइयों को नोटिस देकर कार्रवाई की गई। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय उद्योग, सामाजिक संगठन और नागरिक भी जुड़े। पुनर्जीवन की शुरुआत: फरवरी 2025इस अभियान की शुरुआत इसी वर्ष फरवरी महीने में की गई थी। मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन ने बताया: “नून नदी को चिन्हित करने के लिए ड्रोन और सैटेलाइट से सर्वेक्षण कराया गया। कई जगह नदी पूरी तरह अतिक्रमित और गाद से भरी थी। हमने इसे प्रशासनिक योजना से आगे बढ़ाकर जनभागीदारी का अभियान बना दिया। आज परिणाम सबके सामने है – नदी फिर से बह रही है।” “जनभागीदारी से संभव है जल पुनर्जागरण” – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि जल संसाधनों की पुनर्स्थापना केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है। “एक जिला – एक नदी” अभियान इसी सोच का विस्तार है। नून नदी का यह पुनर्जीवन अब उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा बन चुका है। यह दिखाता है कि जब संकल्प, सहयोग और सहभागिता एक साथ होते हैं, तो मरी हुई नदियां भी दोबारा जीवनदायिनी बन सकती हैंनून नदी: अब सिर्फ एक जलधारा नहीं, गांवों की जीवनधारा आज नून नदी फिर से खेती के लिए जल दे रही है, पशु-पक्षियों के लिए आश्रय बन रही है, और गांवों की सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनती जा रही है। नदी के साथ लौटी हरियाली, बढ़ा भू-जल स्तर, और फैली खुशहाली – ये सभी संकेत हैं कि सही नेतृत्व और जनशक्ति मिलकर प्राकृतिक पुनर्निर्माण की मिसाल कायम कर सकते हैं।

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