
Breaking Today, Digital Desk : दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार को अरविंद केजरीवाल के सरकारी बंगले के आवंटन को लेकर थोड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि आप ऐसा नहीं कर सकते कि कुछ मामलों में तो नियम मानें और कुछ में अपनी मर्जी चलाएं। ‘आप चुन-चुनकर फैसला नहीं ले सकते’, यह बात कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से तब कही, जब मामला मुख्यमंत्री के टाइप-VI बंगले को खाली करवाने से जुड़ा था।
दरअसल, केंद्र ने तर्क दिया था कि केजरीवाल को यह बंगला खाली करना चाहिए क्योंकि उनका पद अब उस श्रेणी में नहीं आता जिसके लिए यह बंगला आवंटित हुआ था। लेकिन कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि अगर सरकार कोई नियम बनाती है, तो उसे सबके लिए एक जैसा लागू करना होगा, न कि सिर्फ अपनी सुविधा के अनुसार।
यह मामला तब शुरू हुआ जब केंद्र सरकार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिया गया टाइप-VI बंगला खाली करने का नोटिस भेजा। केंद्र का कहना था कि मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें जो नया बंगला आवंटित किया गया है, वह उनके मौजूदा पद के हिसाब से सही नहीं है और उन्हें पुराने बंगले से बाहर निकल जाना चाहिए। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इस पर अपनी नाराजगी जताई और कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में और स्पष्टता दिखानी चाहिए।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ-साफ कहा, “आप यह नहीं कह सकते कि फलां नियम इस व्यक्ति पर लागू होगा लेकिन उस व्यक्ति पर नहीं।” कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी नियमों का पालन सभी को समान रूप से करना चाहिए और सरकार को इस तरह ‘पिक एंड चूज’ (चुनना और छोड़ना) का रवैया नहीं अपनाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या सरकार ने अन्य ऐसे मामलों में भी इसी तरह की कार्रवाई की है, जहां पद बदलने के बाद भी लोग पुराने बंगलों में रह रहे हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई अब कुछ समय बाद होगी, जिसमें केंद्र सरकार को इस पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा। देखना होगा कि इस पर आगे क्या फैसला आता है, लेकिन फिलहाल तो हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को आईना दिखा दिया है।






