
Breaking Today, Digital Desk : जानी-मानी अभिनेत्री सामंथा रूथ प्रभु ने सफलता की अपनी परिभाषा को साझा करते हुए एक शक्तिशाली संदेश दिया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि महिलाओं के लिए सच्ची सफलता सिर्फ उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि उन सीमाओं और लेबलों से मुक्त होना है जो समाज उन पर लगाता है.
सिडनी में 11वें भारतीय फिल्म महोत्सव (IFFS) के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए, सामंथा ने रूढ़ियों को तोड़ने और सामाजिक बंधनों से मुक्त होने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि सफलता का अर्थ है स्वतंत्रता को अपनाना और यह चुनौती देना कि महिलाएं क्या कर सकती हैं और क्या नहीं.
अपने विचारों को और स्पष्ट करते हुए सामंथा ने कहा, “मेरे लिए सफलता का मतलब उन दायरों को तोड़कर आगे बढ़ना है जो दूसरों ने आपके लिए बनाए हैं. मैं इस इंतजार में नहीं रहती कि कोई और आकर मुझे बताए कि मैं सफल हूं.” उन्होंने आगे कहा कि सफलता अपने जुनून को बिना किसी सीमा के जीने में है.
सामंथा ने अपनी निजी और पेशेवर यात्रा के बारे में भी खुलकर बात की, जिसमें उन्होंने उन बाधाओं का जिक्र किया जिनका उन्होंने सामना किया और कैसे दृढ़ संकल्प के साथ अपने करियर को आकार दिया. अभिनेत्री, जो अब एक निर्माता भी हैं, ने इस नई भूमिका को सशक्तिकरण का एक जरिया बताया. यह उन्हें ऐसी कहानियों को सामने लाने का अवसर देता है जो सार्थक और प्रभावशाली हैं.
महोत्सव की निदेशक, मीतू भौमिक लांगे ने सामंथा की यात्रा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह महोत्सव की भावना से मेल खाती है, जो प्रामाणिकता, दृढ़ता और विभिन्न आवाजों का जश्न मनाता है.






