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भारत की महिला क्रिकेट टीम और मंदिरा बेदी, एक अनसुनी कहानी…

India's women's cricket team and Mandira Bedi, an untold story...

Breaking Today, Digital Desk : ये बात उन दिनों की है जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम को वो पहचान नहीं मिली थी, जिसकी वो हकदार थीं। आज भले ही हमारी महिला क्रिकेटर्स स्टार्स हैं, लेकिन एक वक्त था जब उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। उन्हीं मुश्किलों में से एक थी पैसों की कमी, खासकर जब उन्हें बाहर जाकर मैच खेलने होते थे।

कीजिए, एक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के लिए आप किसी दूसरे शहर या देश जाएं और आपके पास होटल में रुकने के पैसे न हों! ये सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम के साथ ऐसा हो चुका है। उन दिनों बीसीसीआई (BCCI) का जितना ध्यान पुरुष क्रिकेट टीम पर था, उतना महिला टीम पर नहीं दिया जाता था।

ऐसे ही एक मौके पर, जब महिला टीम को एक अहम मैच के लिए यात्रा करनी थी, तो उनके सामने पैसों की दिक्कत आ गई। होटल का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में एक शख्सियत आगे आईं, जिन्होंने शायद अपनी इस मदद का कभी जिक्र भी नहीं किया। वो थीं मशहूर अभिनेत्री और एंकर, मंदिरा बेदी।

मंदिरा बेदी हमेशा से क्रिकेट की बहुत बड़ी फैन रही हैं। उन्होंने न सिर्फ क्रिकेट मैचों की होस्टिंग की है, बल्कि इस खेल से उनका गहरा लगाव भी रहा है। जब उन्हें महिला टीम की इस परेशानी के बारे में पता चला, तो उन्होंने बिना किसी देरी के अपनी तरफ से होटल के खर्च का इंतजाम किया। ये कोई छोटी-मोटी रकम नहीं थी, बल्कि एक पूरी टीम के ठहरने का खर्च था।

उनकी इस मदद की वजह से ही टीम बिना किसी चिंता के मैच खेल पाई और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकी। मंदिरा बेदी ने ये सब बिना किसी दिखावे के किया। उन्होंने कभी इस बात का ढोल नहीं पीटा और न ही इसे अपनी पब्लिसिटी के लिए इस्तेमाल किया। ये उनकी सच्ची इंसानियत और खेल के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।

आज जब हम भारतीय महिला क्रिकेट टीम को इतनी बुलंदियों पर देखते हैं, तो हमें उन लोगों को भी याद करना चाहिए जिन्होंने मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया। मंदिरा बेदी का ये योगदान शायद इतिहास के पन्नों में उतना दर्ज न हो, लेकिन टीम के खिलाड़ियों के लिए ये किसी बड़े आशीर्वाद से कम नहीं था। उनकी इस दरियादिली ने न सिर्फ टीम को मदद दी, बल्कि उन्हें ये एहसास भी दिलाया कि कोई तो है जो उनके साथ खड़ा है।

ये कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची मदद वो होती है जिसका जिक्र न हो, लेकिन जिसका असर दूर तक जाए। मंदिरा बेदी ने एक खिलाड़ी के तौर पर नहीं, बल्कि एक सच्चे इंसान के तौर पर भारतीय महिला क्रिकेट को एक नई दिशा देने में अपना योगदान दिया।

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