
Breaking Today, Digital Desk : क्या आपने कभी सोचा है कि अगर विदेशी टैलेंट न होता, तो आज सिलिकॉन वैली कहाँ होती? शायद जवाब है, कहीं नहीं! ये बात मैं नहीं कह रहा, बल्कि जाने-माने वैज्ञानिक और भविष्यवेत्ता मिचियो काकू ने कई साल पहले एक इंटरव्यू में कही थी, जिसका वीडियो आज फिर से वायरल हो रहा है।
काकू ने साफ-साफ कहा था कि अगर H-1B वीज़ा पर रोक लगा दी जाए, तो सिलिकॉन वैली का नामोनिशान मिट जाएगा। उनके मुताबिक, इस टेक हब में आधे से ज्यादा वैज्ञानिक और इंजीनियर विदेशी हैं। अगर ये लोग न हों, तो गूगल, इंटेल, याहू, ईबे जैसी कंपनियाँ शायद कभी बन ही नहीं पातीं।
अभी हाल ही में, जब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति थे, उन्होंने H-1B वीज़ा के नियमों को और सख्त कर दिया था। उनका मानना था कि इससे अमेरिकी नागरिकों को नौकरी के ज़्यादा मौके मिलेंगे। लेकिन काकू की ये पुरानी बात आज भी उतनी ही सच लगती है।
सोचिए, भारत और चीन जैसे देशों के कितने ही टैलेंटेड लोग हर साल सिलिकॉन वैली पहुँचते हैं। वे वहाँ नए आइडियाज़ लाते हैं, नई चीज़ें बनाते हैं और टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाते हैं। अगर ये सब रुक जाए, तो अमेरिका के इस सबसे बड़े इनोवेशन हब का क्या होगा?
काकू ने तो यहाँ तक कहा था कि ‘सिलिकॉन वैली विदेशी दिमाग पर बनी है।’ इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिका की इस कामयाबी में दुनिया भर से आए टैलेंट का बहुत बड़ा हाथ है। ट्रंप के इस कदम से कई लोगों को चिंता थी कि कहीं अमेरिका अपनी सबसे बड़ी ताकत, यानी इनोवेशन, को ही खो न दे।
यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में ऐसे वीज़ा नियमों का सिलिकॉन वैली और ग्लोबल टेक्नोलॉजी लैंडस्केप पर क्या असर पड़ता है।




