
Breaking Today, Digital Desk : यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने यूरोपीय संघ और अमेरिका से भारत के साथ अपने संबंध मजबूत करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि भारत ज्यादातर मुद्दों पर यूक्रेन के साथ खड़ा है, और इसलिए नई दिल्ली के साथ घनिष्ठ संबंध बनाना पश्चिमी देशों के लिए फायदेमंद होगा।
क्या भारत वाकई यूक्रेन के साथ है?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर काफी बहस हो सकती है। एक तरफ, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन के खिलाफ रूसी आक्रमण की निंदा की है और मानवीय सहायता भी भेजी है। दूसरी तरफ, भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है और संयुक्त राष्ट्र के कई प्रस्तावों पर मतदान से दूर रहा है, जो रूस के खिलाफ थे।
ज़ेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन रूस के साथ युद्ध में फंसा हुआ है और उसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन की सख्त जरूरत है। भारत, दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्रों में से एक होने के नाते, वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है।
भारत की “गुटनिरपेक्षता” की नीति
भारत की विदेश नीति हमेशा से “गुटनिरपेक्षता” पर आधारित रही है, जिसका अर्थ है कि वह किसी भी गुट का हिस्सा नहीं है और अपने हितों के अनुसार फैसले लेता है। इस नीति के तहत, भारत ने रूस और पश्चिमी देशों दोनों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश की है।
ज़ेलेंस्की का आग्रह पश्चिमी देशों के लिए एक चुनौती पेश करता है। क्या वे भारत को अपने पाले में लाने में सफल होंगे? या भारत अपनी पारंपरिक गुटनिरपेक्षता की नीति पर कायम रहेगा?
यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में भारत, यूक्रेन, यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच संबंध किस दिशा में जाते हैं।




