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गाज़ा से वापसी से लेकर पूर्ण नियंत्रण तक, 20 सालों में कैसे बदली इज़राइल की रणनीति…

From withdrawal from Gaza to full control, how Israel's strategy changed in 20 years.

Breaking Today, Digital Desk : यह सवाल आज मध्य-पूर्व की सबसे जटिल सच्चाइयों में से एक है कि जो इज़राइल लगभग 20 साल पहले गाज़ा पट्टी से पूरी तरह बाहर निकल गया था, वही आज उस पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण स्थापित करने के लिए एक बड़ा अभियान चला रहा है। इस विरोधाभास को समझने के लिए, हमें 2005 के उस ऐतिहासिक फैसले और उसके बाद के बदलते हालातों को देखना होगा।

2005 में इज़राइल ने गाज़ा क्यों खाली किया था?

2005 में, तत्कालीन इज़राइली प्रधानमंत्री एरियल शेरोन ने एक साहसिक और विवादास्पद योजना लागू की, जिसे ‘डिसइंगेजमेंट प्लान’ (पीछे हटने की योजना) कहा गया। इस योजना के तहत, इज़राइल ने गाज़ा पट्टी में मौजूद अपनी 21 बस्तियों को पूरी तरह से खाली कर दिया और वहाँ तैनात अपने सभी सैनिकों को वापस बुला लिया। लगभग 9,000 इज़राइली निवासियों को उनके घरों से हटाया गया, जिन्हें वहाँ दशकों से बसाया गया था।

इस फैसले के पीछे कई मुख्य कारण थे:

सुरक्षा और जनसंख्या का दबाव: इज़राइल का मानना था कि गाज़ा की घनी आबादी वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र पर सीधा नियंत्रण रखना सुरक्षा के लिए एक बड़ा बोझ बन गया था।

एकतरफा कदम: यह कदम किसी शांति समझौते का हिस्सा नहीं था, बल्कि इज़राइल का एकतरफा फैसला था। इसका उद्देश्य बिना किसी बातचीत के अपनी सुरक्षा सीमाओं को फिर से परिभाषित करना था।

अंतर्राष्ट्रीय छवि: इज़राइल को उम्मीद थी कि इस कदम से दुनिया में उसकी छवि सुधरेगी और फिलिस्तीनियों के साथ संघर्ष कम होगा।

एक वरिष्ठ इज़राइली सलाहकार, डोव वीसग्लास ने उस समय समझाया था कि इस योजना का एक मकसद शांति प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से रोकना था, जिससे फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना को अनिश्चित काल के लिए टाला जा सके।

योजना का उलटा असर: हमास का उदय

इज़राइल की वापसी से गाज़ा में एक राजनीतिक शून्य पैदा हो गया। 2007 में, फिलिस्तीनी प्राधिकरण को हटाकर हमास ने बलपूर्वक गाज़ा पट्टी पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। इज़राइल द्वारा एक आतंकवादी संगठन माने जाने वाले हमास के सत्ता में आने से पूरी स्थिति बदल गई। जिस गाज़ा को इज़राइल ने संघर्ष कम करने की उम्मीद में छोड़ा था, वह उसके खिलाफ हमलों का एक बड़ा अड्डा बन गया। यहाँ से लगातार इज़राइली शहरों पर रॉकेट दागे जाने लगे।

अब ‘पूर्ण नियंत्रण’ का लक्ष्य क्यों?

मौजूदा सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य हमास को नष्ट करना और यह सुनिश्चित करना है कि गाज़ा फिर कभी इज़राइल के लिए खतरा न बन सके। 7 अक्टूबर, 2023 के हमलों ने इज़राइल की उस नीति को पूरी तरह विफल साबित कर दिया जो उसने 2005 में अपनाई थी। अब इज़राइल का लक्ष्य केवल सीमाओं पर गश्त करना नहीं, बल्कि पूरे गाज़ा पर सुरक्षा नियंत्रण स्थापित करना है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि इज़राइल का इरादा गाज़ा पर कब्जा करना या शासन करना नहीं है, बल्कि हमास को खत्म करने के बाद इसे किसी अरब शासी बल को सौंपना है। मौजूदा योजना के तहत, इज़राइली सेना गाज़ा शहर और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर नियंत्रण कर रही है, जिसके लिए हज़ारों रिज़र्व सैनिकों को बुलाया गया है।

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