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योगी सरकार का नया वार, अब बैठकों में नेताजी नहीं, उनके रिश्तेदार भी नहीं घुस पाएंगे…

Yogi government's new attack, now not only Netaji but even his relatives will not be able to enter the meetings...

Breaking Today, Digital Desk : योगी सरकार ने निकायों की बैठकों में परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों के शामिल होने पर सख्त रोक लगा दी है। अब इन बैठकों में सदस्यों या नामित सदस्यों की जगह उनके सगे-संबंधी शामिल नहीं हो पाएंगे। इस कदम से शहरी और ग्रामीण स्थानीय स्वशासन में पारदर्शिता आने और जवाबदेही तय होने की उम्मीद है।

पहले ऐसा देखा गया है कि कई नगर निकायों और पंचायतों की बैठकों में निर्वाचित सदस्य या नामित सदस्य खुद आने के बजाय अपने पति, पत्नी, बेटे, बहू या किसी अन्य रिश्तेदार को भेज देते थे। ये रिश्तेदार न सिर्फ बैठकों में शामिल होते थे, बल्कि चर्चाओं में भाग लेते थे और कई बार तो फैसले लेने में भी दखल देते थे। इसे ‘प्रॉक्सी रिप्रेजेंटेशन’ कहा जाता था, जिस पर अब लगाम कसी जाएगी।

सरकार का मानना है कि यह चलन लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के खिलाफ है और इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है। चुने हुए प्रतिनिधियों का काम है कि वे खुद जनता के प्रति जवाबदेह हों, न कि उनके रिश्तेदार।

क्या कहते हैं नए निर्देश?

नए निर्देशों के तहत, अब सिर्फ वही व्यक्ति बैठक में शामिल हो सकेगा जो विधिवत रूप से निर्वाचित सदस्य है या जिसे सरकार ने नामित किया है। अगर कोई सदस्य किसी कारणवश बैठक में शामिल नहीं हो पाता है, तो उसकी जगह कोई और (चाहे वह उसका रिश्तेदार ही क्यों न हो) प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सिर्फ अधिकृत व्यक्ति ही जनहित के मुद्दों पर चर्चा और निर्णय लें।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य स्थानीय निकायों के कामकाज में सुधार लाना, पारदर्शिता बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। यह कदम निश्चित रूप से स्थानीय स्वशासन को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

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