
Breaking Today, Digital Desk : अक्सर बिहार की राजनीति में ‘जंगलराज’ शब्द खूब उछाला जाता है, खासकर जब लालू यादव के शासनकाल की बात आती है। लेकिन अब इसमें एक नया मोड़ आ गया है। असदुद्दीन ओवैसी ने एक बयान देकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने कहा है कि बिहार ने ‘जंगलराज’ के सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग दौर देखे हैं – एक लालू यादव के समय और दूसरा नीतीश कुमार के राज में।
ओवैसी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब लोग जंगलराज की बात करते हैं, तो वो आमतौर पर 1990 से 2005 तक के लालू-राबड़ी शासनकाल को याद करते हैं। उस दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठते थे। लेकिन ओवैसी का कहना है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी हालात पूरी तरह से नहीं सुधरे। उन्होंने इशारा किया कि भले ही नीतीश कुमार ‘सुशासन बाबू’ के तौर पर जाने जाते हों, लेकिन उनके कार्यकाल में भी कई ऐसी घटनाएं हुईं, जो जंगलराज से कम नहीं थीं।
उन्होंने खास तौर पर मुसलमानों के खिलाफ होने वाली घटनाओं और कथित तौर पर प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। ओवैसी का कहना है कि बिहार में अल्पसंख्यकों के साथ कई जगहों पर अन्याय हुआ है और उन्हें न्याय नहीं मिला है। उनके मुताबिक, चाहे सत्ता में आरजेडी रही हो या जेडीयू, दोनों ने ही लोगों की उम्मीदों पर पूरी तरह से खरा नहीं उतरी।
ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। उनके इस बयान से लालू और नीतीश, दोनों ही खेमे में हलचल मचना तय है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी पार्टियों की तरफ से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है। क्या वाकई बिहार ने जंगलराज के दो अलग-अलग चेहरे देखे हैं, जैसा कि ओवैसी कह रहे हैं? यह सवाल अब बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ सकता है।






