
Breaking Today, Digital Desk : उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में रामलीला मंचन को लेकर चल रहा विवाद थम गया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक स्कूल ग्राउंड पर रामलीला के आयोजन की अनुमति दे दी है, हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि वे ऐसे आयोजनों को ‘मंजूरी’ नहीं देते हैं। यह मामला फिरोजाबाद के राजा का ताल स्थित एस. आर. के. इंटर कॉलेज से जुड़ा है, जहाँ दशकों से रामलीला का मंचन होता आ रहा है।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, कुछ समय पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल ग्राउंड पर रामलीला के आयोजन पर रोक लगा दी थी। हाई कोर्ट का कहना था कि स्कूल की जमीन का इस्तेमाल धार्मिक आयोजनों के लिए नहीं किया जा सकता। इस फैसले के खिलाफ रामलीला कमेटी सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई। कमेटी का तर्क था कि यह परंपरा 40-50 सालों से चली आ रही है और इससे किसी को कोई आपत्ति नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस और संजय कुमार की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए रामलीला आयोजन की अनुमति दे दी। जस्टिस बोस ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “हम इसे मंजूरी नहीं दे रहे हैं, लेकिन हम इस पर रोक भी नहीं लगा रहे हैं। हम आपकी परेशानी समझते हैं।”
कोर्ट ने कहा कि अगर यह आयोजन इतने लंबे समय से होता आ रहा है और इससे कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं हुई है, तो इसे रोका नहीं जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मामले को दोबारा हाई कोर्ट भेज दिया है, ताकि हाई कोर्ट तथ्यों की फिर से जाँच कर सके। तब तक के लिए रामलीला का आयोजन हो सकेगा।
छात्रों की पढ़ाई पर असर नहीं
रामलीला कमेटी ने कोर्ट को यह भी बताया कि आयोजन केवल शाम के समय होता है और इससे छात्रों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ता। कमेटी ने यह भी आश्वस्त किया कि स्कूल की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा और न ही किसी तरह का अतिक्रमण होगा।
इस फैसले से फिरोजाबाद के स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है, जो रामलीला को अपनी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग मानते हैं।




