
Breaking Today, Digital Desk : सनी देओल की फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ आज भारतीय सिनेमा की एक मील का पत्थर मानी जाती है. इसके डायलॉग्स, गाने और सनी के दमदार अभिनय को लोग आज भी याद करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रिलीज से पहले बॉलीवुड के गलियारों में इस फिल्म को लेकर घोर निराशा का माहौल था? खुद सनी देओल ने इस बात का खुलासा करते हुए बताया है कि उस वक्त इंडस्ट्री के लोगों को न तो यह फिल्म समझ आई थी और न ही इसके गाने पसंद आए थे.
हाल ही में एक बातचीत के दौरान, सनी देओल ने उन दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वह इंडस्ट्री के लोगों को ‘गदर’ के गाने सुनाते थे, तो उन्हें कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिलती थी. उन्होंने कहा, “जब भी मैं लोगों को गाने सुनाता था, तो उन्हें वो पसंद नहीं आते थे.” सनी का मानना है कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच एक बड़ा फासला है. उनके शब्दों में, “इंडस्ट्री और दर्शक एकमत नहीं हैं. जब आपको ज्यादा मिल जाता है, तो आप भूल जाते हैं. आप अपनी कला से दूर हो जाते हैं.”
सनी देओल ने यह भी बताया कि फिल्म की रिलीज से पहले इसे ‘पंजाबी फिल्म’ कहकर कई वितरकों ने खरीदने से इनकार कर दिया था. कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया था कि इसे हिंदी में डब किया जाना चाहिए. हालांकि, सनी देओल और फिल्म के निर्देशक अनिल शर्मा को अपनी कहानी पर पूरा भरोसा था.
दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में सनी देओल खुद भी इस फिल्म को करने को लेकर बहुत उत्सुक नहीं थे. उन्होंने बताया कि जब निर्देशक अनिल शर्मा ऊटी में उन्हें कहानी सुनाने आए, तो उन्होंने पहले ज्यादा ध्यान नहीं दिया. लेकिन, जब उन्होंने पूरी कहानी सुनी तो उन्हें इससे प्यार हो गया और उन्होंने तुरंत फिल्म के लिए हां कह दी.
‘गदर: एक प्रेम कथा’ जब 2001 में रिलीज हुई, तो इसने बॉक्स ऑफिस पर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. दर्शकों के प्यार ने उन सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया जो फिल्म की सफलता पर शक कर रहे थे. फिल्म की ऐतिहासिक सफलता ने यह साबित कर दिया कि कहानी में दम हो तो वह भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से कहीं ऊपर उठ जाती है. ठीक 22 साल बाद, इसके सीक्वल ‘गदर 2’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर भारी सफलता हासिल करके इस इतिहास को दोहराया.






