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पूजा पाल शादी के नौ दिन बाद ही विधवा, फिर राजनीति में लिखी संघर्ष की कहानी…

Pooja Pal became a widow just nine days after marriage, then wrote the story of struggle in politics

Breaking Today, Digital Desk : महज 25 साल की उम्र में नियति ने पूजा पाल के जीवन में ऐसा भूचाल ला दिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। शादी के मात्र नौ दिन बाद ही उनके पति और तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूजा को तोड़कर रख दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने पति के लिए न्याय की लड़ाई को ही अपने जीवन का मकसद बना लिया। इसी मकसद ने उन्हें राजनीति के उस मैदान में उतार दिया, जहां से उनके पति की यात्रा का दुखद अंत हुआ था।

पति की हत्या से राजनीति में प्रवेश

25 जनवरी 2005 को पूजा पाल के पति राजू पाल की हत्या कर दी गई थी, जिसका आरोप गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ पर लगा। राजू पाल ने इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट के उपचुनाव में अतीक के भाई अशरफ को हराया था, और इसी राजनीतिक रंजिश को उनकी हत्या का कारण माना जाता है। पति की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि तत्कालीन बसपा प्रमुख मायावती ने पूजा पाल को उपचुनाव में उसी सीट से उम्मीदवार बना दिया। हालांकि, वह उपचुनाव हार गईं, लेकिन 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जीत हासिल कर अपने राजनीतिक सफर का दमदार आगाज किया।

बसपा से सपा और फिर निष्कासन

पूजा पाल ने 2012 में भी अपनी सीट पर जीत बरकरार रखी, लेकिन 2017 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने बहुजन समाज पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। 2022 के विधानसभा चुनाव में वह कौशांबी जिले की चायल सीट से सपा के टिकट पर विधायक चुनी गईं।

राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बना चुकीं पूजा पाल उस समय एक बार फिर सुर्खियों में आ गईं, जब उन्होंने अपने पति के हत्यारोपी अतीक अहमद के मारे जाने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की। उन्होंने मुख्यमंत्री को न्याय दिलाने के लिए धन्यवाद दिया, जिसके कुछ ही घंटों बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया।

न्याय की लंबी लड़ाई

पूजा पाल ने अपने पति के लिए न्याय की एक लंबी और कठिन लड़ाई लड़ी है। उन्होंने इस मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की थी। वर्षों के इंतजार के बाद, मार्च 2024 में इस मामले में सात लोगों को दोषी ठहराया गया। पूजा पाल का जीवन संघर्ष, दुख और दृढ़ संकल्प की एक ऐसी कहानी है, जो भारतीय राजनीति में महिलाओं के लिए एक मिसाल है। उन्होंने न केवल अपने पति के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, बल्कि राजनीति में भी अपनी एक मजबूत जगह बनाई।

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