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हाईकोर्ट का अहम फैसला, बालिग महिला के धर्मांतरण के आरोप में आरोपी को जमानत…

Important decision of the High Court, bail granted to the accused on the charge of conversion of an adult woman

Breaking Today, Digital Desk : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए जबरन धर्मांतरण और शारीरिक शोषण के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत दे दी है. कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि शिकायतकर्ता एक 32 वर्षीय बालिग महिला है और दोनों के बीच संबंध सहमति से शुरू हुए थे जो बाद में खराब हो गए.

यह मामला तब सामने आया जब एक 32 वर्षीय महिला ने इस साल 31 मई को अपने सहकर्मी आदिल अब्बास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई. शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि कार्यालय में काम के दौरान दोनों करीब आए, और इस दौरान अब्बास ने उसके कुछ निजी फोटो और वीडियो बना लिए. महिला का आरोप है कि आरोपी इन वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल कर रहा था, जिसके चलते उसे शारीरिक संबंध बनाने पड़े और करीब दो लाख रुपये भी देने पड़े.

प्राथमिकी के अनुसार, जब महिला ने शादी की बात की तो आरोपी ने उस पर धर्म बदलने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया. इसी आरोप के आधार पर अब्बास के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.

आरोपी के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल को इस मामले में झूठा फंसाया गया है. उन्होंने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता एक बालिग महिला हैं और वह “अपने रिश्ते के परिणामों से अच्छी तरह वाकिफ थीं.” बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि यह रिश्ता सहमति से शुरू हुआ था और बाद में इसमें खटास आ गई थी. अदालत का ध्यान इस ओर भी दिलाया गया कि जांच के दौरान कोई भी आपत्तिजनक सामग्री, जैसे फोटो या वीडियो, बरामद नहीं हुई.

न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी आदिल अब्बास को जमानत दे दी. अदालत ने मुख्य रूप से तीन बातों पर ध्यान दिया: पहला, शिकायतकर्ता एक बालिग महिला है, दूसरा, दोनों के बीच रिश्ते समय के साथ खराब हुए थे, और तीसरा, जांच के दौरान कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली. अदालत ने आरोपी को यह निर्देश भी दिया कि वह या उसके परिवार का कोई भी सदस्य शिकायतकर्ता को किसी भी तरह से ट्रैक करने या संपर्क करने की कोशिश नहीं करेगा, और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में जमानत रद्द की जा सकती है.

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