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नीतीश कुमार का वो पल, जो आज भी बिहार की राजनीति में गूंज रहा…

That moment of Nitish Kumar, which is still resonating in Bihar politics

Breaking Today, Digital Desk : एक दिन मैं मुख्यमंत्री बनूंगा!” बिहार की चुनावी चर्चाओं में ये वो लाइन है, जो इन दिनों खूब गूंज रही है. ये बात कही थी नीतीश कुमार ने, साल 1977 में, जब वो एक छात्र नेता हुआ करते थे. उस समय की कहानी कुछ ऐसी है कि एक दिन गुस्से में उन्होंने टेबल पर पंच मारते हुए अपने दोस्तों से ये बात कही थी. आज जब हम बिहार चुनाव की गहमा-गहमी देख रहे हैं, तो नीतीश कुमार का वो जोश और आत्मविश्वास भरा पल अचानक से याद आ जाता है.

आज से करीब 47 साल पहले, कौन जानता था कि एक नौजवान लड़के का ये सपना सच हो जाएगा? उस समय की राजनीति और आज की राजनीति में बहुत फ़र्क है, लेकिन नीतीश कुमार का वो दृढ़ संकल्प आज भी उनके राजनीतिक सफ़र का एक अहम हिस्सा रहा है. बिहार के लोग अक्सर उनके पुराने दिनों की बातें याद करते हैं, जब वो राजनीति में नए-नए आए थे और उनमें कुछ कर दिखाने का जुनून था.

उनके इस पुराने किस्से को सुनकर कई लोगों को प्रेरणा मिलती है कि कैसे एक आम इंसान भी बड़े सपने देख सकता है और उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष कर सकता है. बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का ये “टेबल-पंच वाला पल” सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि उनके पूरे राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसे आज भी लोग बड़े चाव से सुनते और सुनाते हैं. ये कहानी हमें बताती है कि कैसे एक छोटी सी बात, सही समय पर कही गई, एक इंसान के भविष्य की दिशा तय कर सकती है.

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