
Breaking Today, Digital Desk : केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कथित तौर पर अपने निजी लाभ के लिए नियमों की अवहेलना करते हुए जवानों को गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए मजबूर करने का मामला सामने आया है। यह घटना बल के भीतर ক্ষমতার दुरुपयोग और स्थापित प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सूत्रों के अनुसार, यह घटना तब प्रकाश में आई जब कुछ जवानों ने नाम न छापने की शर्त पर इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें एक ऐसे व्यक्ति को गार्ड ऑफ ऑनर देने का आदेश दिया जो इस सम्मान के लिए अधिकृत नहीं था। गार्ड ऑफ ऑनर एक औपचारिक सम्मान है जो केवल विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों और संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों को ही दिया जाता है। इसके लिए रक्षा और गृह मंत्रालयों द्वारा स्पष्ट दिशानिर्देश निर्धारित हैं।
आरोपों के मुताबिक, जवानों ने शुरू में इस आदेश का पालन करने में झिझक दिखाई क्योंकि यह नियमों के खिलाफ था। हालांकि, उन पर “बॉस” का आदेश मानने का दबाव डाला गया। इस घटना ने सीआईएसएफ के भीतर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपने पद के दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
इस मामले पर अभी तक सीआईएसएफ की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, इस घटना ने बल के भीतर अनुशासन और प्रोटोकॉल के पालन पर एक बहस छेड़ दी है। कई पूर्व अधिकारियों ने इस तरह की घटना को अस्वीकार्य बताया है और मामले की गहन जांच की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि जवानों के मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।




