Sliderअन्यझकझकीदेश-विदेशमीडिया जगतराजनीतिवायरल न्यूज़वीडियो

शशि थरूर का संदेश: “राष्ट्र सर्वोपरि है, पार्टी माध्यम मात्र”

कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद एवं कार्यकारी समिति सदस्य शशि थरूर ने ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ संवाद दिए हैं, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी पार्टी का मकसद देश को बेहतर बनाना होता है—और उसके लिए विचारों में मतभेद होना स्वीकार्य है। हाल ही में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में विषय था ‘शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय विकास’। इसी मंच से थरूर ने अपने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर मोदी सरकार की सराहना और उस पर आई आलोचना के बीच अपना दृढ़ रुख साझा किया।

शशि थरूर ने कहा कि वह देश के सुरक्षा बलों और सरकार के निर्णयों का समर्थन जारी रखेंगे क्योंकि राष्ट्रहित से बड़ा कोई उच्च लक्ष्य नहीं। उन्होंने स्पष्टीकरण दिया कि पार्टियों का दूसरों से असहमत होना उनका अधिकार है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर उनका मानना है कि राष्ट्र सर्वोपरि है, और सभी पार्टियों का उद्देश्य है—अपने तरीके से एक बेहतर भारत का निर्माण। उन्होंने जोर देकर कहा:“बहुत से लोग मेरे रुख से सहमत नहीं हैं, लेकिन मैं अपनी बात पर अड़ा रहूंगा।उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि वे साधारण लोकतांत्रिक मतभेदों को स्वीकार करते हुए देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।

थरूर ने बताया कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद वैश्विक स्तर पर भारत का पक्ष रखते हुए एक देश-हितैषी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व स्वीकार किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उन्होंने व्यक्तिगत और राष्ट्रीय दृष्टि से लिया—”मैंने भारतवर्ष की दृष्टि से बात की, मैंने कभी किसी की ओर से नहीं बोला”। उन्होंने परोक्ष रूप से संकेत दिया कि यह कार्य कांग्रेस की आधिकारिक स्थिति नहीं, बल्कि उनका व्यक्तिगत दायित्व था ।

इस कदम से उन्हें न केवल सराहना मिली, बल्कि केन्द्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने भी समर्थन देते हुए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया—”क्या कांग्रेस चाहती है कि भारतीय सांसद विदेश जाकर भारत एवं प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलें?  थरूर ने यह भी साफ किया कि उनका दृष्टिकोण “एक पार्टी छोड़ना” नहीं है। उन्होंने एक विशिष्ट लेख में लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा, अंतरराष्ट्रीय संवाद और नेतृत्व क्षमता भारत के लिए एक प्रमुख सम्पत्ति है और उन्हें दुनिया भर में अधिक व्यापक समर्थन मिलना चाहिए।

Related Articles

Back to top button