
Breaking Today, Digital Desk : हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में एक अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला, जहाँ पाकिस्तान जैसे देश ने दूसरों को मानवाधिकारों पर ज्ञान देना शुरू कर दिया। इस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए पाकिस्तान को आईना दिखाया। भारत ने साफ कहा कि यह कितनी हास्यास्पद बात है कि एक ऐसा देश, जिसका अपना रिकॉर्ड मानवाधिकारों के मामले में बेहद खराब है, वो दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ा रहा है।
भारत ने दो टूक शब्दों में पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि पहले उसे अपने गिरेबान में झाँकना चाहिए। भारत ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान में खुद अल्पसंख्यकों के साथ कैसा बर्ताव होता है, ये किसी से छिपा नहीं है। वहाँ धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है, जबरन धर्मांतरण कराए जाते हैं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार आम बात है। इन सब बातों को नजरअंदाज करके पाकिस्तान कैसे दूसरों को मानवाधिकारों पर लेक्चर दे सकता है?
यह सिर्फ एक बयानबाजी नहीं थी, बल्कि भारत ने UNHRC में पाकिस्तान की पोल खोलकर रख दी। भारत ने वहाँ मौजूद सभी देशों का ध्यान इस बात पर दिलाया कि पाकिस्तान को अपनी अंदरूनी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, बजाय इसके कि वो बेवजह दूसरे देशों के मामलों में दखल दे। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की हरकत की हो, और हर बार भारत ने उसे मुंहतोड़ जवाब दिया है।
भारत का यह कदम न सिर्फ पाकिस्तान को सबक सिखाने वाला था, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी यह सोचने पर मजबूर किया कि ऐसे मंचों का इस्तेमाल अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। मानवाधिकार एक गंभीर मुद्दा है और इस पर वही देश बात करें, जो खुद इसका सम्मान करते हों।




