
Breaking Today, Digital Desk : मासिक धर्म (पीरियड्स) शुरू होने से कुछ दिन या हफ़्ते पहले कई महिलाओं को शारीरिक और भावनात्मक रूप से असहजता महसूस होती है। इसे प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) कहते हैं। यह महज़ मूड खराब होने से कहीं ज़्यादा है; इसके पीछे जटिल हार्मोनल और न्यूरोलॉजिकल बदलाव होते हैं। यह एक ऐसी स्थिति है जो महिलाओं को उनके प्रजनन वर्षों के दौरान प्रभावित करती है और इसमें कई तरह के शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक लक्षण शामिल हैं। अनुमान है कि हर 4 में से 3 मासिक धर्म वाली महिलाओं ने किसी न किसी रूप में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम का अनुभव किया है।
पीएमएस के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर इनमें मूड में उतार-चढ़ाव, चिड़चिड़ापन, चिंता, स्तन में कोमलता, थकान, सूजन और भोजन की लालसा शामिल है। ज़्यादातर महिलाओं के लिए ये लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन कुछ के लिए ये इतने गंभीर हो सकते हैं कि उनके रोज़मर्रा के जीवन पर असर डालते हैं। पीएमएस का एक और भी गंभीर रूप है जिसे प्रीमेंस्ट्रार dysphoric विकार (PMDD) कहते हैं।
हार्मोनल उतार-चढ़ाव: मुख्य कारण
पीएमएस का सटीक कारण अभी भी पूरी तरह से ज्ञात नहीं है, लेकिन माना जाता है कि मासिक धर्म चक्र के दौरान होने वाले हार्मोनल परिवर्तन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मासिक धर्म चक्र के दूसरे भाग में, जिसे ल्यूटियल चरण कहा जाता है, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में भारी उतार-चढ़ाव होता है। ऐसा माना जाता है कि ये हार्मोनल बदलाव ही पीएमएस के कई लक्षणों की जड़ हैं।
एस्ट्रोजन: यह हार्मोन मासिक धर्म चक्र के पहले भाग में बढ़ता है। एस्ट्रोजन सेरोटोनिन के उत्पादन को बढ़ाता है, जो “अच्छा महसूस” कराने वाला न्यूरोट्रांसमीटर है और मूड को सकारात्मक बनाए रखने में मदद करता है। जब एस्ट्रोजन का स्तर गिरता है, तो सेरोटोनिन का स्तर भी कम हो सकता है, जिससे उदासी, चिड़चिड़ापन और भोजन की लालसा जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं।
प्रोजेस्टेरोन: यह हार्मोन ओव्यूलेशन के बाद बढ़ता है। यह गामा-एमिनोब्यूट्रिक एसिड (GABA) नामक न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि को बढ़ाता है, जो मन को शांत रखने में मदद करता है। जब प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिरता है, तो GABA की गतिविधि भी कम हो सकती है, जिससे चिंता, नींद न आना और घबराहट जैसे लक्षण हो सकते हैं।
मस्तिष्क का कनेक्शन: न्यूरोट्रांसमीटर की भूमिका
हमारे मस्तिष्क में मौजूद रसायन, जिन्हें न्यूरोट्रांसमीटर कहा जाता है, हमारी भावनाओं, विचारों और व्यवहार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हार्मोन के स्तर में बदलाव इन न्यूरोट्रांसमीटरों के काम को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
सेरोटोनिन: यह न्यूरोट्रांसमीटर मूड, नींद और भूख को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है। मासिक धर्म चक्र के दौरान हार्मोनल परिवर्तनों के कारण सेरोटोनिन का स्तर कम हो सकता है, जिससे अवसाद, थकान, और भोजन की लालसा जैसे पीएमएस के लक्षण हो सकते हैं। जिन महिलाओं को पीएमएस होता है उनमें सेरोटोनिन का स्तर स्वाभाविक रूप से कम हो सकता है।
डोपामाइन: एस्ट्रोजन डोपामाइन की गतिविधि को भी प्रभावित करता है, जो प्रेरणा और एकाग्रता के लिए आवश्यक है। डोपामाइन का निम्न स्तर फोकस में कमी और खराब मूड का कारण बन सकता है।
गामा-एमिनोब्यूट्रिक एसिड (GABA): यह एक शांत करने वाला न्यूरोट्रांसमीटर है। प्रोजेस्टेरोन का स्तर GABA की गतिविधि को बढ़ाता है। GABA के स्तर में कमी से चिंता, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या हो सकती है।
कुछ महिलाओं में जेनेटिक कारणों से भी हार्मोनल परिवर्तनों के प्रति अधिक संवेदनशीलता हो सकती है, जो उन्हें पीएमएस के प्रति अधिक प्रवण बनाती है। अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि पीएमएस से पीड़ित महिलाओं के मस्तिष्क की संरचना और कार्य में उन महिलाओं की तुलना में अंतर हो सकता है जिन्हें यह समस्या नहीं है।
पीएमएस का प्रबंधन
हालांकि पीएमएस का कोई निश्चित इलाज नहीं है, लेकिन जीवनशैली में कुछ बदलावों और उपचारों से इसके लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव प्रबंधन तकनीकें जैसे कि योग और ध्यान, और पर्याप्त नींद लेना लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकते हैं। कुछ मामलों में, डॉक्टर दर्द निवारक, हार्मोनल गर्भनिरोधक या एंटीडिप्रेसेंट, विशेष रूप से सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर (SSRIs) की सलाह दे सकते हैं, जो सेरोटोनिन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि पीएमएस एक वास्तविक चिकित्सीय स्थिति है जिसके पीछे हार्मोनल और न्यूरोलॉजिकल कारण हैं। यदि आपके लक्षण गंभीर हैं और आपके जीवन को प्रभावित कर रहे हैं, तो किसी स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से बात करना महत्वपूर्ण है।






