
Breaking Today, Digital Desk : क्रिकेट, जिसकी दीवानगी हमारे देश में सिर चढ़कर बोलती है, अक्सर बड़े विवादों में फंस जाता है। इस बार मामला उत्तराखंड से जुड़ा है, जहाँ हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (CAU) से एक बड़ा सवाल पूछा है। ये सवाल ₹12 करोड़ के उस फंड से जुड़ा है, जो BCCI ने CAU को दिए थे, लेकिन अब उस पैसे के हिसाब-किताब पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इस पूरे मामले में ‘केले’ का खर्च चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन ने ₹35 लाख सिर्फ केले खरीदने पर खर्च कर दिए! जी हाँ, ₹35 लाख के केले! अब आप सोचिए, इतने केले आखिर किस काम के लिए खरीदे गए होंगे? ये बात किसी के भी गले नहीं उतर रही।
उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने इस मामले में BCCI और CAU दोनों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि उन्हें ₹12 करोड़ के इस पूरे लेन-देन और खर्च का विस्तृत हिसाब चाहिए। यह नोटिस एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए जारी किया गया, जिसमें उत्तराखंड क्रिकेट में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि BCCI ने 2014 से 2019 के बीच उत्तराखंड क्रिकेट को बढ़ावा देने और राज्य में क्रिकेट गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए लगभग ₹12 करोड़ का फंड दिया था। लेकिन इस पैसे का इस्तेमाल सही तरीके से नहीं हुआ, बल्कि बड़े पैमाने पर घपलेबाजी की गई। केले के अलावा, ₹12 लाख की पानी की बोतलें और ₹15 लाख के समोसे जैसे खर्चे भी सवालों के घेरे में हैं। ये आंकड़े अपने आप में चौंकाने वाले हैं।
अब देखना होगा कि BCCI और CAU इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं। यह मामला सिर्फ पैसों के लेन-देन का नहीं, बल्कि क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है। उम्मीद है कि हाईकोर्ट इस मामले की तह तक जाएगा और सच्चाई सबके सामने आएगी, ताकि क्रिकेट पर लोगों का भरोसा बना रहे।



