लखनऊ बनेगा भारत का पहला ‘एआई सिटी’, भविष्य की तकनीक और रोजगार का नया केंद्र…
Lucknow will become India's first 'AI City', New center of future technology and employment

Breaking Today, Digital Desk : देश के पहले ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिटी’ के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत, लखनऊ को एआई तकनीक, अनुसंधान और विकास के एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने और हजारों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है। उनका कहना है कि लखनऊ को एआई सिटी का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। इस पहल का मकसद राज्य को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “20 साल पहले लखनऊ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका चूक गया था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।”
क्या है एआई सिटी परियोजना
यह परियोजना लखनऊ के नादरगंज औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 70 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी, जो हवाई अड्डे के काफी करीब है। इसका उद्देश्य एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है जहां दुनिया की बेहतरीन टेक्नोलॉजी कंपनियां, स्टार्टअप्स और शिक्षण संस्थान एक साथ मिलकर काम कर सकें। इस शहर में प्लग-एंड-प्ले ऑफिस स्पेस, विश्व स्तरीय डेटा सेंटर, लैब और लग्जरी व किफायती आवासीय परिसर होंगे ताकि ‘वॉक-टू-वर्क’ मॉडल को बढ़ावा दिया जा सके।
इस परियोजना को सफल बनाने के लिए सरकार ने कई बड़ी घोषणाएं की हैं। भारत सरकार ने ‘इंडिया एआई मिशन’ के लिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट स्वीकृत किया है, जिसका लाभ इस परियोजना को भी मिलेगा। राज्य सरकार आईटी पार्क और आईटी सिटी स्थापित करने वाली कंपनियों को पूंजीगत व्यय में छूट के साथ-साथ स्टांप शुल्क में 100% छूट जैसे वित्तीय प्रोत्साहन भी देगी।
निवेश और रोजगार की संभावनाएं
इस परियोजना से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में एआई और डीप टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 100 से अधिक कंपनियां यहां निवेश करेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में माइक्रोसॉफ्ट और एचसीएल जैसी बड़ी कंपनियों के साथ एआई सेंटर स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं। इस पहल से 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
यह परियोजना न केवल लखनऊ या उत्तर प्रदेश के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत को एआई के वैश्विक मानचित्र पर एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी और देश के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।






